अल्मोड़ा भाकृअनुप - विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा में 53 वें कृषि विज्ञान मेले का आयोजन
By सुरेन्द्र सिंह रावत
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Sep 28, 2026 21:14
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अल्मोड़ा में भाकृअनुप-विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा के प्रयोगात्मक प्रक्षेत्र, हवालबाग में आज दिनांक 28 सितम्बर, 2026 को ’सशक्त और सुपोषित महिला कृषक : विकसित कृषि का आधार’ थीम पर आधारित 53वें कृषि विज्ञान मेले का अत्यंत उत्साहजनक और भव्य आयोजन किया गया। इस वर्ष का मेला संस्थान के गौरवशाली इतिहास में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ, जहाँ पर्वतीय कृषि की आधुनिकतम तकनीकों और शोध परिणामों को सीधे किसानों तक पहुँचाने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलन, राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम तदुपरान्त परिषद गीत से हुआ जिसने कृषि विज्ञान मेले के माहौल को गरिमामय बना दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. संजय कुमार, माननीय अध्यक्ष, कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल, नई दिल्ली द्वारा किया गया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथियों के रूप में डॉ. ए. के. शर्मा, पूर्व निदेशक, भाकृअनुप-राष्ट्रीय कृषि उपयोगी सूक्ष्म जीव ब्यूरो, मऊ; डॉ. सी. तिवारी, अध्यक्ष, कृषि विज्ञान केन्द्र, मटेला; डॉ. नरेन्द्र कुमार, संयुक्त निदेशक, उद्यान विभाग, उत्तराखण्ड; श्री आनन्द गोस्वामी, मुख्य कृषि अधिकारी, अल्मोड़ा उपस्थित रहे।
मेले की गतिविधियों का औपचारिक आरंभ कृषकों के स्टॉल भ्रमण के साथ हुआ, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों से आए किसानों ने संस्थान द्वारा विकसित की जा रही उन्नत फसलों और नवीन कृषि तकनीकों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। इसके उपरांत कृषि विज्ञान मेले का विधिवत उद्घाटन और प्रदर्शनी स्टालों का भ्रमण किया गया, जहाँ मुख्य अतिथि और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने वैज्ञानिकों से नवीनतम शोधों पर चर्चा की। संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कान्त ने अपने स्वागत भाषण में सभी अतिथियों और कृषकों का अभिनंदन करते हुए संस्थान की उपलब्धियों और पर्वतीय किसानों के कल्याण हेतु किए जा रहे प्रयासों का विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने संबोधन में संस्थान के पर्वतीय कृषि में किए गए योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संस्थान अब तक 204 उन्नत प्रजातियां विकसित कर चुका है जिसमें उनके द्वारा विशेष रूप से जैव सुदृढ़ीकृत मक्का की किस्मों 'वी.एल. त्रिपोषी', 'वी.एल. सुपोषिता' एवं वी. एल. वीटा की सफलता का उल्लेख किया जो पोषण सुरक्षा की दृष्टि से मील का पत्थर हैं। अन्न का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि अन्न की खेती दक्षिण भारत के अतिरिक्त उत्तराखण्ड में भी विशेष रूप से की जाती है। यहां श्री अन्न की खेती धान के बराबर के क्षेत्रफल में की जाती है तथा संस्थान द्वारा विकसित 20 मंडुवा एवं 7 मादिरा की प्रजातियां दक्षिण भारत में भी अच्छा प्रदर्शन दे रही है। संस्थान की सब्जी मटर की प्रजाति वी. एल. सब्जी मटर 13 जो कि उत्तराखण्ड के लिए विमोचित है, भारतवर्ष में हर क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन कर धूम मचा रही है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि संस्थान ने उर्वरकों की खपत कम करने हेतु विशेष बैक्टीरिया खोजा है । अपने वक्तव्य में उन्होंने यह भी कहा कि संस्थान द्वारा वर्षा जल संरक्षण एवं उचित जल उपयोग तकनीकी भी विकसित की गयी है जो पर्वतीय क्षेत्रों के लिए अत्यन्त लाभकारी है। डॉ. कान्त ने मशरूम उत्पादन और मौनपालन के माध्यम से किसानों की आय कई गुना बढ़ाने के सफल उदाहरण भी साझा किए। जंगली जानवरों की समस्या जो कि विकसित कृषि संकल्प अभियान के तहत कृषकों से ज्ञात हुई, का जिक्र करते हुए डॉ. कान्त ने बताया कि चेन लिंक फेंसिंग एवं सोलर फेंसिंग के उपयोग द्वारा पर्वतीय कृषक अपनी खेती को बचा सकते है।
मुख्य अतिथि डॉ. संजय कुमार, माननीय अध्यक्ष, कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल, नई दिल्ली ने संस्थान की उपलब्धियों हेतु संस्थान के निदेशक एवं वैज्ञानिकों को बधाई दी। पारम्परिक कृषि पद्धति "बारानाज़ा" के द्वितीय संस्करण मूल्यवर्धन करके बारानाज़ा पद्धति को अपनाने पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि यह पद्धति इतनी प्रभावशाली है कि यदि एक फसल का अच्छा उत्पादन न हो ताे दूसरी फसल इस पद्धति में अच्छा उत्पादन दे सकती है। उनके अनुसार उत्तराखण्ड की धरती मेहनतकश लोगों की धरती है जहां के कृषक फसल उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ फसल पोषण पर भी ध्यान देते है। अत: हम सभी का कर्तव्य है कि राष्ट्र के परिपेक्ष्य में हम ऐसे कृषकों की उपेक्षा न करें। जहां तक सम्भव हो उन्हें हर आवश्यक सुविधाएं प्रदान करें। उनके अनुसार अन्न के मूल्यवर्धित उत्पाद बनाकर यहां के कृषक और उद्यमी अपना स्वयं का मॉल खोलकर अपनी आय में संवर्धन कर सकते है और यहां के स्थानीय उत्पादों को एक विशेष पहचान दिला सकते है। उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों की विशेष फसलों जैसे गहत, मसूर, काली सोयाबीन इत्यादि के उत्पादन बढ़ाने एवं मूल्य संवर्धन पर बल दिया। साथ ही उन्होंने काफल की शैल्फ लाइफ बढ़ाने, फूल, सुगन्धित पौधों एवं औषधीय पौधों की पर्वतीय क्षेत्रों में खेती करने पर बल दिया और कहा कि इसके लिए नीति बदलने की आवश्यकता है। इस क्षेत्र में उन्होंने प्रसंस्करण इकाई, ब्रैंडिंग की आवश्यकता का महत्व सभी कृषकों को समझाया तथा संस्थान के वैज्ञानिकों से कम पानी प्रयोग वाली प्रजातियों का विकास करने का आह्वान किया।
विशिष्ट अतिथि डॉ. ए. के. शर्मा ने जैविक कृषि पर बल देते हुए कहा कि आज आवश्यकता है कि कृषक विषरहित उत्पाद तैयार करें ताकि समाज को कई बीमारियों से बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन एवं ग्लोबल वार्मिंग के मध्येनजर किसानों को यह ध्यान रखने की आवश्यकता है कि उन्हें अपनी खेती को किस ओर ले जाना है इसके लिए वे संस्थान की नई तकनीकों एवं विशेषज्ञों से सलाह भी ले सकते है। उनके अनुसार कृषि को रोजगारपरक बनाने की आज अत्यन्त आवश्यकता है। इससे पूर्व विशिष्ट अतिथि डॉ. सी. तिवारी ने कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से नई प्रजातियों को सुदूरवर्ती क्षेत्रों तक पहुँचाने पर बल दिया तथा जैविक खेती की आवश्यकता बताई। प्रगतिशील किसानों का सम्मान कार्यक्रम अत्यन्त हृदयस्पर्शी रहा, जहाँ उनकी कड़ी मेहनत और नवीन तकनीकों को अपनाने के उनके जज्बे को सराहा गया। सम्मानित किसानों ने अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार संस्थान की तकनीकों ने उनकी आय और जीवन स्तर में सुधार किया है। मेले के दौरान प्रगतिशील किसान श्री उमेश सिंह, शशि भटनागर, त्रिलोचन राज टम्टा, देवेन्द्र सिंह बिष्ट, संगीता देवी, शिवराज सिंह परमार, हीरा देवी एवं चंचल राम को पुरस्कृत किया गया। इस अवसर पर संस्थान में चल रही अनुसूचित जाति उपयोजना के अन्तर्गत अल्मोड़ा जनपद के खूंट, धामस, ताड़ीखेत, घनेली एवं पोखरी, चखुटिया क्षेत्र के रामपुर एवं भनोटिया तथा बागेश्वर जनपद के भाटनीकोट, उडेरखानी, लखनी एवं चौगांवछीना के कृषकों को 37 वी. एल. टूलकिट, 5 मंडुवा थ्रैशर, 8 पावर वीडर तथा 130 तिरपाल का वितरण किया गया। कृषि विज्ञान मेला के अवसर पर मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों द्वारा संस्थान की सब्जी मटर की प्रजाति वी. एल. श्रेष्ठा, चारकोल आधारित वी. एल. बायोजेंट 9 का लोकार्पण किया गया। इसके अतिरिक्त संस्थान के प्रकाशनों नामत: पर्वतीय कृषि दर्पण तथा प्रसार प्रपत्र वी. एल. बहु-फल एवं सब्जी श्रेणीकरण यंत्र (ग्रेडर) का विमोचन किया गया।
इस अवसर पर वी. एल पॉलीटनल के व्यवसायीकरण हेतु मैसर्स पराशर एग्रोटेक बायो प्राइवेट लिमिटेड, वाराणसी, उत्तर प्रदेश तथा वी. एल. सब्जी मटर 13 के व्यवसायीकरण हेतु मैसर्स अम्बर एग्रोवेट, रूद्रपुर, ऊधमसिंहनगर के साथ समझौता किया गया। मेले में आयोजित प्रदर्शनी में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अनेक संस्थानों, कृषि विज्ञान केन्द्रों एवं सरकारी तथा गैर सरकारी संस्थानों द्वारा प्रतिभाग किया गया। इस अवसर पर विभिन्न संस्थानों एवं विभागों के वैज्ञानिक एवं अधिकारीगणों के अतिरिक्त 398 कृषक भी उपस्थित थे। मेले में आयोजित कृषक गोष्ठी में पर्वतीय कृषि से सम्बन्धित विभिन्न पहलुओं पर महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की गयी साथ ही कृषकों की विभिन्न समस्याओं का कृषि वैज्ञानिकों द्वारा त्वरित समाधान किया गया। विभिन्न कृषकों द्वारा अपने अनुभव साझा किये गये। कृषि विज्ञान मेले में कृषक गोष्ठी का संचालन डा. अनुराधा भारतीय तथा श्रीमती निधि सिंह एवं धन्यवाद प्रस्ताव डा. निर्मल कुमार हेडाऊ, प्रभागाध्यक्ष, फसल सुधार द्वारा किया गया।28
सुरेन्द्र सिंह रावत
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Professional journalist writing regular analytical and research reports on key political, cultural, and technological fields globally.
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