हरिद्वार की एक इलेक्ट्रिकल गुड्स निर्माता फर्म पर राज्य कर विभाग ने बड़ी कार्रवाई में करीब 12 करोड़ रुपए की जीएसटी चोरी का मामला पकड़ा है, प्रारंभिक जांच में पिछले दो वर्षों में लगभग 14 करोड़ रुपए की कर चोरी के संकेत मिले हैं, उत्तराखंड राज्य कर विभाग की सीआईयू (Central intelligence unit) ने हरिद्वार स्थित एक इलेक्ट्रिकल गुड्स निर्माता इकाई से जुड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर छापेमारी की, इस दौरान करोड़ों रुपये की जीएसटी चोरी का खुलासा हुआ, विभागीय अधिकारियों के अनुसार जांच के दौरान फर्म ने मौके पर ही 12 करोड़ रुपए का जीएसटी जमा कराया है, जबकि प्रारंभिक जांच में पिछले दो वित्तीय वर्षों में लगभग 14 करोड़ रुपए की टैक्स चोरी के प्रमाण मिले हैं।
राज्य कर विभाग की ओर से जारी प्रेस नोट के अनुसार चार जून 2026 को आयुक्त कर प्रतीक जैन के निर्देश पर सीआईयू टीम ने हरिद्वार स्थित इलेक्ट्रिकल गुड्स निर्माता इकाई और उससे जुड़े व्यापारिक स्थलों की जांच की, यह कार्रवाई डेटा विश्लेषण, जीएसटी रिटर्न, ई-वे बिल और विभिन्न गोपनीय सूचनाओं के आधार पर की गई, जांच के दौरान विभाग को फर्म के कारोबार में लगातार वृद्धि दिखाई दी, लेकिन उसके अनुपात में कर जमा नहीं किया जा रहा था, इसी संदेह के आधार पर अधिकारियों ने आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) की श्रृंखला, माल के मूवमेंट, परिवहन व्यवस्था और एएनपीआर कैमरों से प्राप्त वाहन गतिविधियों का विस्तृत विश्लेषण किया, जांच में सामने आया कि फर्म कुछ कंपनियों से माल की वास्तविक प्राप्ति किए बिना ही इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ ले रही थी और इसके माध्यम से अपनी कर देनदारी को कम दिखाया जा रहा था।
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि छापेमारी और दस्तावेजों की जांच के दौरान संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ की गई, इसके अलावा डिजिटल डिवाइस, व्यापारिक रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की भी जांच की गई, जांच में यह स्पष्ट हुआ कि फर्म कथित तौर पर फर्जी और बोगस बिलों का उपयोग कर रही थी, जिसके जरिए बड़े पैमाने पर जीएसटी चोरी को अंजाम दिया गया, राज्य कर विभाग के अनुसार शुरुआती जांच में पिछले दो वित्तीय वर्षों के दौरान लगभग 14 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी सामने आई है, हालांकि कार्रवाई के दौरान ही फर्म ने विभाग के समक्ष 12 करोड़ रुपये का जीएसटी जमा करा दिया, विभाग इसे जांच के दौरान हुई एक बड़ी वसूली मान रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि अभी जब्त किए गए अभिलेखों और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण जारी है, इसलिए कर चोरी की वास्तविक राशि में और वृद्धि होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, इस दौरान टीम ने फर्म के विभिन्न व्यापारिक स्थलों से बड़ी मात्रा में दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिए. डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच के लिए विशेषज्ञ टीम की भी सहायता ली जा रही है, ताकि लेन-देन और बिलिंग से जुड़े पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके, विभाग का राज्य में फर्जी बिलिंग और बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट के जरिए राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाले कारोबारियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा, आधुनिक तकनीक, डेटा एनालिटिक्स, ई-वे बिल मॉनिटरिंग और एएनपीआर कैमरों से प्राप्त सूचनाओं के जरिए संदिग्ध कारोबारों पर नजर रखी जा रही है, इस कार्रवाई को राज्य कर विभाग की हाल के समय की बड़ी उपलब्धियों में माना जा रहा है।
