रुद्रप्रयाग के मद्महेश्वर घाटी स्थित राजकीय इंटर कॉलेज राउलैक परिसर और ऊखीमठ–रासी मोटर मार्ग के किनारे खड़े हरे-भरे चीड़ के पेड़ों के अवैध कटान का सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है, सूचना मिलते ही वन विभाग रुद्रप्रयाग की गुप्तकाशी यूनिट टीम मौके के लिए रवाना हो गई है, वन दरोगा अभिषेक नेगी ने बताया कि टीम मौके के लिए रवाना हो चुकी है और पूरे प्रकरण की गंभीरता से जांच की जा रही है, जानकारी के अनुसार, कई चीड़ के पेड़ों को बिना किसी वैधानिक अनुमति के काट दिया गया, जिससे मामला बेहद गंभीर हो गया है, वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस क्षेत्र में पेड़ों के कटान की कोई अनुमति जारी नहीं की गई थी, इसलिए यह पूरी तरह अवैध कृत्य है, घटना को लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है, उनका कहना है कि दिनदहाड़े इस तरह पेड़ों का कटान होना प्रशासनिक व्यवस्था और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
लोगों ने आरोप लगाया कि यदि समय-समय पर निगरानी होती, तो इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सकता था, पर्यावरणविदों ने भी इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि चीड़ जैसे महत्वपूर्ण वृक्षों का इस तरह अवैध कटान पारिस्थितिकी तंत्र के लिए गंभीर खतरा है और इससे क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, उन्होंने सरकार से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ-साथ भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है, वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार मामले की जांच तेज कर दी गई है और दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ वन अधिनियम के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
वन दरोगा अभिषेक नेगी ने बताया कि टीम मौके के लिए रवाना हो चुकी है और पूरे प्रकरण की गंभीरता से जांच की जा रही है, इस घटना ने एक बार फिर पर्वतीय क्षेत्रों में वन संपदा की सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं, अब देखना होगा कि प्रशासन और वन विभाग इस मामले में कितनी तेजी और पारदर्शिता के साथ कार्रवाई करते हैं और दोषियों को कब तक कानून के दायरे में लाया जाता है।
