चम्पावत में रोजाना कहां गायब हो रहा 400 लीटर दूध, दुग्ध समितियों के लिए सिर दर्द बनी ये पहेली
By सुरेन्द्र सिंह रावत
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Oct 14, 2026 15:50
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पशुपालक मेहनत से दूध पैदा करता है और दुग्ध समितियों में बेचता है। लेकिन दूध की खरीद में लीटर और किलोग्राम के अंतर ने हिसाब-किताब की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले में 315 दुग्ध समितियां संचालित हैं। समितियों में दूध की मात्रा लीटर में दर्ज होती है, जबकि प्लांट में उसका वजन किलोग्राम में किया जाता है। दुग्ध संघ के अनुसार 100 लीटर दूध का वजन गुणवत्ता के आधार पर करीब 102 से 103 किलो तक हो सकता है। ऐसे में सवाल है कि दूध की मात्रा में आने वाले इस अंतर का हिसाब कैसे रखा जाता है और इससे होने वाली आय किस खाते में दर्ज होती है।
पशुपालक राजेश बिष्ट का कहना है कि पूरी प्रक्रिया की जांच होनी चाहिए। उनका सवाल है कि जब समिति में दूध लीटर में दर्ज होता है और प्लांट पर किलो में तौला जाता है, तो दोनों जगह के आंकड़ों का मिलान कैसे किया जाता है। क्या पशुपालकों को इसकी जानकारी दी जाती है। वर्तमान में कुल समितियों से 20 हजार लीटर से अधिक दुग्ध उत्पादन हो रहा है। ऐसे में यदि 100 लीटर पर दो लीटर भी अधिक माने तो लगभग रोजाना करीब 400 लीटर दूध की मात्रा के आधार पर सवाल उठ रहे हैं। दूध की खरीद में फैट, एसएनएफ, गुणवत्ता और भुगतान की गणना का तरीका पशुपालकों को स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए। समिति में दर्ज दूध की मात्रा, प्लांट पर प्राप्त वजन और भुगतान का रिकॉर्ड सामने आने से स्थिति साफ हो सकती है।
सुरेन्द्र सिंह रावत
Verified Reporter
Professional journalist writing regular analytical and research reports on key political, cultural, and technological fields globally.
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