अल्मोड़ा

16-18 अक्टूबर 2024 के दौरान “मशरूम की खेती” पर किसानों के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम

सुरेन्द्र सिंह रावत By सुरेन्द्र सिंह रावत Oct 21, 2024 11:59 1 views 0 Comments
16-18 अक्टूबर 2024 के दौरान “मशरूम की खेती” पर किसानों के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम

अल्मोड़ा जिले के किसानों के लिए ‘‘मशरूम की खेती‘‘ पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम 16 से 18 अक्टूबर 2024 के दौरान प्रायोगिक फार्म, भाकृअनुप-विवेकानन्...

अल्मोड़ा जिले के किसानों के लिए ‘‘मशरूम की खेती‘‘ पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम 16 से 18 अक्टूबर 2024 के दौरान प्रायोगिक फार्म, भाकृअनुप-विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, हवालबाग, अल्मोड़ा में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को बटन और ढींगरी मशरूम की खेती की तकनीक का प्रशिक्षण देना था। किसानों को बटन मशरूम उत्पादन के लिए मशरूम कम्पोस्ट तैयार करने, स्पॉन तैयार करने, ऑयस्टर मशरूम की खेती के लिए सब्सट्रेट के स्पॉनिंग, बैग भरने और आवरण मिट्टी की तैयारी और अनुप्रयोग के लिए सैद्धांतिक और व्यावहारिक जानकारी दी गई। उन्हें फसल कटाई के बाद की प्रक्रियाओं, मूल्य संवर्धन और उपज के विपणन के बारे में भी जागरूक किया गया।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम हंस आजीविका परियोजना के तहत आयोजित किया गया, जिसे एनजीओ-हंस फाउंडेशन, अल्मोड़ा द्वारा प्रायोजित किया गया। प्रशिक्षण में उत्तराखंड के अल्मोड़ा एवं टिहरी गढ़वाल जिले से कुल 28 किसानों (महिला-07 और पुरुष-21) ने भाग लिया। प्रशिक्षण के उद्घाटन समारोह में कार्यवाहक निदेशक डॉ. के के मिश्रा ने किसानों के ज्ञान और कौशल में सुधार के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम के महत्व पर जोर दिया, जिससे खेती की आय में सुधार करने में मदद मिलेगी। उन्होंने किसानों से इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का पूरा लाभ उठाने का आग्रह किया।

डॉ. के.के. मिश्रा, पी.के. मिश्रा, गौरव वर्मा, रमेश सिंह पाल और श्रीमती निधि सिंह द्वारा मशरूम उत्पादन, स्पॉन उत्पादन, रोग, कीट और उनके प्रबंधन, मशरूम के औषधीय और पोषण संबंधी महत्व, खाद बनाने की प्रक्रिया में सूक्ष्मजीवों की भूमिका, मूल्य संवर्धन और विपणन के विभिन्न पहलुओं पर व्याख्यान और व्यावहारिक सत्र आयोजित किए गए। कृषक और वैज्ञानिक संवाद के दौरान, किसानों ने दिखाया कि उनके कौशल में सुधार हुआ है और अब वे मशरूम उत्पादन को आय के अतिरिक्त स्रोत के रूप में अपनाने के लिए अधिक आश्वस्त हैं।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन समारोह में निदेशक डॉ. लक्ष्मी कांत ने किसानों से मशरूम उत्पादन के बारे में प्राप्त ज्ञान और व्यावहारिक जानकारी साझा करने का आग्रह किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन प्रमाण-पत्र वितरण और डॉ. पी. के. मिश्रा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. के. के. मिश्रा, पी. के. मिश्रा और रमेश सिंह पाल ने किया।

सुरेन्द्र सिंह रावत

सुरेन्द्र सिंह रावत

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Professional journalist writing regular analytical and research reports on key political, cultural, and technological fields globally.

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