अल्मोड़ा में मल्ला महल में तीन दिवसीय आजीविका सरस मेले का शुभारंभ, कुमाऊँ आयुक्त ने किया स्टॉलों का निरीक्षण
By सुरेन्द्र सिंह रावत
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Oct 31, 2026 09:04
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अल्मोड़ा के ऐतिहासिक मल्ला महल परिसर में आज तीन दिवसीय जनपद स्तरीय आजीविका सरस मेले का शुभारंभ कुमाऊँ आयुक्त दीपक रावत ने फीता काटकर किया। जिला प्रशासन एवं ग्राम्य विकास विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित मेले का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों एवं स्वायत्त सहकारिताओं के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराना तथा उनकी आजीविका को सशक्त बनाना है। उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन एवं ग्रामोत्थान परियोजना के अंतर्गत आयोजित इस मेले में कुल 25 स्टॉल लगाए गए हैं।
इनमें बेकरी उत्पाद, प्रसंस्कृत फल उत्पाद, पहाड़ी मसाले, जैविक दालें, पारंपरिक उत्पाद, ऐपण कला एवं हथकरघा से निर्मित सामग्री प्रदर्शित की गई है। स्थानीय संसाधनों एवं पारंपरिक कौशल से तैयार ये उत्पाद मेले में आने वाले लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।उद्घाटन के उपरांत कुमाऊँ आयुक्त ने मेले में लगाए गए सभी स्टॉलों का निरीक्षण किया। उन्होंने ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों की गुणवत्ता एवं उनकी मेहनत की सराहना की। उन्होंने स्थानीय नागरिकों एवं पर्यटकों से इन स्वदेशी एवं जैविक उत्पादों को अधिक से अधिक खरीदने की अपील करते हुए कहा कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और महिला समूहों की आय बढ़ाने में सहयोग प्राप्त होगा।
समावेशी शिक्षा के वास्तविक स्वरूप को साकार करने के लिए पारंपरिक कक्षा के नियमों में बदलाव लाना अनिवार्य है, ताकि तंत्रिका-विविधता (न्यूरोडाइवर्जेंट) से ग्रस्त बच्चों की सीखने की अनूठी शैली को अपनाया जा सके। यह मुख्य विचार हाल ही में आयोजित एक पैनल चर्चा में उभरकर सामने आया, जिसका शीर्षक “एवरी चाइल्ड कैरीज़ ए स्टोरी” (हर बच्चे की अपनी एक कहानी होती है) था। इस चर्चा का संचालन वसुधा पंत द्वारा किया गया, जिसमें प्रख्यात लेखिका अनीता शर्मा और स्प्रिंगडेल्स पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्य ज्याित्सना ने मुख्य वक्ता के रूप में भाग लिया।चर्चा के दौरान सीखने की गति और बुद्धिमत्ता के बीच के पुराने दृष्टिकोण को कड़ी चुनौती दी गई। वक्ताओं ने इस बात पर विशेष बल दिया कि किसी बच्चे का धीमी गति से सीखना उसकी मानसिक कमजोरी नहीं है, बल्कि यह सीखने का एक अलग और विशिष्ट मार्ग है।
इस सत्र में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शिक्षा में क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिए बड़े पैमाने पर किए जा रहे प्रयासों को रेखांकित किया गया। ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम से प्रभावित दो बच्चों की माता और लेखिका अनीता शर्मा ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि वे सरकारी सहयोग से विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए 2,700 पुस्तकों का एक विशाल और अनुकूलित पाठ्यक्रम तैयार कर रही हैं। वहीं, प्रधानाचार्य ज्योत्स्ना ने अपने विद्यालय में सहपाठियों के सहयोग पर आधारित समावेशी दृष्टिकोण की जानकारी दी, जहाँ सामान्य बच्चों को अपने बॉर्डरलाइन ऑटिस्टिक सहपाठियों की सक्रिय रूप से सहायता करने और उन्हें साथ लेकर चलने के लिए प्रेरित किया जाता है ताकि कक्षा में स्वाभाविक सहानुभूति का माहौल बन सके। भविष्य में रोजगार की संभावनाओं को देखते हुए, ज्योत्स्ना ने विशेष आवश्यकता वाले युवाओं को उच्च-स्तरीय और भविष्य के अनुकूल तकनीकी कौशल प्रदान करने के लिए एक नई एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) अकादमी शुरू करने की घोषणा की।
सुरेन्द्र सिंह रावत
Verified Reporter
Professional journalist writing regular analytical and research reports on key political, cultural, and technological fields globally.
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