अल्मोड़ा के गोविंद बल्लभ पंत हिमालयी संस्थान के साइंटिस्टों और अधिकारियों पर लगे गंभीर आरोप
By सुरेन्द्र सिंह रावत
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Sep 22, 2026 17:17
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अल्मोड़ा में गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान, कोसी - कटारमल की कार्यप्रणाली को लेकर विवाद सामने आया है। संस्थान से जुड़े कुछ परियोजना कर्मचारियों ने प्रेस वार्ता कर भर्ती प्रक्रिया, प्रबंधन और अनुसंधान कार्यों में अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए हैं। अल्मोड़ा प्रेस क्लब अल्मोड़ा में आयोजित पत्रकार वार्ता में एनएमएचएस पीएमयू से जुड़े डॉ. पुष्कर सिंह और उनके सहयोगियों ने आरोप लगाया कि मिशन के पुनर्गठन और नई भर्तियों में पारदर्शिता नहीं बरती गई। मंत्रालय की संयुक्त सचिव नमिता प्रसाद के समक्ष निदेशक की मौजूदगी में उन्हें सकारात्मक आश्वासन दिए गए। आनलाईन इंटरव्यू लिए गए और इस दौरान सभी कर्मचारियों को बिना कारण नोटिस देकर बाहर कर दिया गया। गत दिनों आए परिणामों में अनेक अनुभवहीन और अयोग्य पात्रों के चयन ने सभी को आहत किया। इससे पूर्व एक परियोजना स्टाफ न्यायालय में जाकर स्वयं के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं। परियोजना स्टाफ भर्ती में न तो डीओपीटी नियमों का पालन किया गया और न ही यह देखा गया कि गैर हिमालयी राज्यों से अनुभवहीन लोगों से किस प्रकार मिशन संचालित किया जाएगा। उन्होंने नोडल अधिकारी एमएस लोधी सहित निदेशक आईडी भट्ट पर लापरवाही करने और जानबूझ कर स्वजनों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से यह कुचक्र रचने का आरोप लगाया और कहा कि जिस मानदेय में वे काम कर रहे थे उसी काम के लिए चार गुने नए परियोजना स्टाफ को दिया जा रहा है। जबकि एक दशक पूर्व वे भी विज्ञप्ति और साक्षात्कार के साथ योग्यता के आधार पर इस पद पर आए थे। दो पीड़ितों ने इस बावत अनुसूचित आयोग से शिकायत की है और न्यायालय में भी लंबी लड़ाई लड़ने की चेतावनी दी।
उन्होंने कहा कि अनुभवहीन लोगों का चयन किया गया है, जबकि लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों को बाहर कर दिया गया। कर्मचारियों ने संस्थान के कुछ अधिकारियों पर पक्षपात और अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो वे मामले को न्यायालय और अन्य मंचों पर उठाएंगे। वक्ताओं ने कहा कि यदि मंत्रालय में कुछ लोगों की मिलीभगत नहीं है तो तत्काल इस विज्ञप्ति को निरस्त कर,पादर्शिता से एनएमएचएस का संचालन किया जाए और योग्य व्यक्ति को एनएमएचएस नोडल बनाया जाए। यह भी आरोप लगाया कि संस्थान किसी परमाणु कार्यक्रम या रक्षा अनुसंधान पर काम नहीं करता है फिर भी कर्मचारियों को नियुक्ति से पूर्व ब्रिटिशकालीन आफिसियल एक्ट के नाम से बाण्ड भरवाकर नियुक्ति दी जा रही है और अकसर मीडिया को अपने अनुसंधान कार्यक्रमों से दूर रखा जाता है। इस अवसर पर संचार सहायक डाॅ पुष्कर सिंह, आईसीटी हैड अरविंद कुमार, और प्रोजेक्ट एसिस्टेंट आईटी गौरव कुमार आदि मौजूद थे। वक्ताओं ने कहा कि स्वतंत्र जाॅच एजेंसी से जांच कर उनके आरोपों को पुष्ट किया जा सकता है।वक्ताओं ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी गोविंद बल्लभ की विरासत को संस्थान का वर्तमान नेतृत्व समाप्त करने पर लगा है और संस्थान की रेपो और आंतरिक प्रबंधन लगातार कुप्रबंधन का शिकार होता जा रहा है।
वक्ताओं ने कहा कि संस्थान के अनुभवहीन कुछ वैज्ञानिक शोध के नाम पर बड़े भ्रष्टाचार मे लिप्त है और मंत्रालय के अधिकारी संभवतः केंद्रीय मंत्री को भी धोखा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ी तो वे एक दशक में उनके सम्मुख विज्ञान और अनुसंधान के नाम पर हो रहे साभी छलावों की पोल खोलेंगे और हिमालयी राज्यों के ऑकड़ों हित संस्थान ने जनता के पैसे के साथ कितना न्याय किया इसका भण्डाफोड़ करेंगे। उन्होंने समाज में बुद्धिजीवियों, लेखकों, पत्रकारों और वैज्ञानिकों से संस्थान की कार्यप्रणाली पर आंखमूंदकर भरोसा न करने की मांग की और कहा कि वह केंद्रीय जाॅच एजेंसियों तक संस्थान के गंभीर भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करेंगें। इसमें परियेाजनाओं के पैसे की बंदबांट से लेकर अयोग्ता को योग्यता साबित करने से लेकर वर्षों से अपने अनुसंधान क्षेत्रों में न जाकर लाखों का वेतनमान डकारने और वैज्ञानिकों की पोल खोलना शामिल है।
सुरेन्द्र सिंह रावत
Verified Reporter
Professional journalist writing regular analytical and research reports on key political, cultural, and technological fields globally.
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