चंपावत जिले का रज्यूड़ा क्षेत्र सड़क सुविधा से महरूम, घायल को चार घंटे डोली में उठाकर सड़क तक पहुंचाया लोगों में रोष
By सुरेन्द्र सिंह रावत
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Aug 10, 2026 16:53
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पहाड़ों में विकास के दावों की एक बार फिर पोल खुल गई, जहां पाटी विकासखंड के रज्यूड़ा गांव में सड़क सुविधा न होने की वजह से घायल को डोली के सहारे अस्पताल पहुंचाना पड़ा, बैल के हमले में गंभीर रूप से घायल ग्रामीण कैलाश भट्ट को उपचार के लिए सड़क तक पहुंचाने में ग्रामीणों को करीब चार घंटे लग गए, इस दौरान खड़ी चढ़ाई और दुर्गम पहाड़ी रास्तों को पार करना पड़ा, जिससे ग्रामीणों की पसीने छूट गए, बता दें कि उत्तराखंड राज्य गठन को भले ही 26 साल का लंबा वक्त बीत गया हो, लेकिन पहाड़ के कई गांव आज भी सड़क जैसी मूलभूत सुविधा के लिए तरस रहे हैं, चंपावत जिले के पाटी विकासखंड के ग्राम पंचायत गागर के तोक साला रज्यूड़ा की तस्वीर शासन-प्रशासन के विकास के दावों पर सवाल खड़े कर रही है, यहां सड़क नहीं होने के कारण एक घायल ग्रामीण को करीब चार घंटे तक डोली में बैठाकर दुर्गम पहाड़ी रास्ते से सड़क तक पहुंचाना पड़ा।
ग्रामीाणों के मुताबिक, साला रज्यूड़ा निवासी कैलाश भट्ट पुत्र पूर्णानंद भट्ट अपने बैलों को पास के खेतों में चारा चुगाने ले जा रहे थे, इसी दौरान एक बैल ने उन पर सींग से हमला कर दिया, हादसे में कैलाश भट्ट गंभीर रूप से घायल हो गए और उनके शरीर से तेजी से रक्तस्राव होने लगा, हालत गंभीर होता देख ग्रामीणों ने तत्काल उन्हें अस्पताल पहुंचाने की तैयारी शुरू की, लेकिन गांव तक सड़क नहीं होने के कारण ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी चुनौती घायल को सड़क तक पहुंचाने की थी, ऐसे में ग्रामीणों ने कुर्सी की डोली तैयार कर कैलाश भट्ट को उसमें बैठाया, फिर कंधों पर उठाकर सड़क की ओर चल पड़े, सड़क तर पहुंचने में लगे 4 घंटे: खड़ी चढ़ाई, दुर्गम रास्ते और उमस के बीच ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा, करीब चार घंटे की मशक्कत के बाद घायल को ग्रामीण सड़क गागर तक पहुंचाया जा सका, इस दौरान रास्ते में ग्रामीणों को कई बार रुककर विश्राम करना पड़ा, सड़क तक पहुंचने के बाद घायल कैलाश भट्ट को निजी वाहन से उपचार के लिए हल्द्वानी रवाना किया गया।
घायल को डोली में लेकर सड़क तक पहुंचाने के दौरान ग्रामीणों में शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ खासा आक्रोश देखने को मिला, ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण की मांग को लेकर वे कई बार शासन-प्रशासन को ज्ञापन दे चुके हैं, लेकिन आज तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ, ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि हर चुनाव में नेता सड़क निर्माण का आश्वासन देकर वोट मांगते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद गांव की सुध लेने कोई नहीं पहुंचता, ग्रामीणों का कहना है कि सड़क नहीं होने के कारण बीमारी, दुर्घटना या आपातकाल की स्थिति में मरीजों को इसी तरह डोली के सहारे सड़क तक पहुंचाना पड़ता है, वहीं, ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से रज्यूड़ा तक जल्द सड़क निर्माण कराने की मांग की है।
सुरेन्द्र सिंह रावत
Verified Reporter
Professional journalist writing regular analytical and research reports on key political, cultural, and technological fields globally.
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