पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत पर सिक्किम की महिला ने लगाया दुष्कर्म का आरोप, बेटे के DNA करने की मांग की
By सुरेन्द्र सिंह रावत
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Nov 08, 2026 08:24
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उत्तराखंड कांग्रेस की चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष और पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत पर शुक्रवार को विभिन्न गंभीर आरोप लगाने वाली सिक्किम निवासी महिला जैनी की शिकायत की जांच महिला पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) वंदना वर्मा को सौंपी गई है। देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) प्रमेंद्र डोभाल ने शनिवार को बताया कि वादिनी इंदिरा डेंजी उर्फ जैनी द्वारा पुलिस मुख्यालय को भेजा गया एक प्रार्थना पत्र देहरादून पुलिस को मिला है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2003 में तत्कालीन मंत्री हरक सिंह रावत ने उनसे दुष्कर्म किया, जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने एक बच्चे को जन्म दिया। यह भी आरोप है कि घटना के समय आरोपी ने अपनी राजनीतिक पहुंच और सरकार में प्रभाव का इस्तेमाल कर मामले में कोई कार्रवाई नहीं होने दी।
एसएसपी ने बताया कि शनिवार को मिले प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि वर्तमान में उनका 23 वर्षीय बेटा अपनी पहचान के लिए संघर्ष कर रहा है। उन्होंने अपने बेटे का डीएनए टेस्ट कराने और वर्ष 2003 के इस प्रकरण में विधि सम्मत कानूनी कार्रवाई की मांग की है। गौरतलब है कि डीएनए जांच पितृत्व की पुष्टि के लिए की जाती है। डोभाल ने स्पष्ट किया कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए डोईवाला की महिला क्षेत्राधिकारी (सीओ) वंदना वर्मा को पूरे प्रकरण की गहनता से जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं उत्तराखंड आवास सलाहकार परिषद की उपाध्यक्ष (राज्यमंत्री) और भाजपा महिला मोर्चा की पूर्व प्रदेश महामंत्री भावना मेहरा ने जैनी प्रकरण को लेकर कांग्रेस और पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत पर शनिवार को हमला बोला।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं ने सत्ता और रसूख के दम पर जैनी की आवाज दबाई। सुश्री मेहरा के अनुसार, जैनी ने पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया है कि 16 साल की उम्र में एक कांग्रेसी नेता ने अपने सरकारी आवास पर उनके साथ दुष्कर्म किया, जिससे वह गर्भवती हो गईं। शिकायत के मुताबिक तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान न्याय देने के बजाय उन्हें मानसिक चिकित्सालय भेज दिया गया। आरोप यह भी है कि अलग-अलग दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराकर उन्हें देहरादून छोड़ने और कभी वापस न लौटने को कहा गया। मेहरा ने इसे गंभीर मामला बताया।एक बयान जारी कर उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस शासनकाल में जैनी को न्याय क्यों नहीं मिला और उनकी शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
उन्होंने पूछा कि क्या सत्ता और राजनीतिक रसूख के आगे एक नाबालिग की पीड़ा को अनदेखा किया गया। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए मेहरा ने कहा कि पार्टी अंकिता भंडारी के नाम पर राजनीतिक बयानबाजी करती है, जबकि अंकिता हत्याकांड के सभी आरोपी जेल में हैं। जैनी के आरोपों पर कांग्रेस की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। बेटियों के सम्मान और न्याय के मामले में दोहरा मापदंड नहीं चल सकता। मेहरा ने आरोपों की निष्पक्ष जांच, पीड़िता को तत्काल सुरक्षा और न्याय की मांग की। उन्होंने कहा कि जांच में दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को उसके राजनीतिक पद, प्रभाव या रसूख के आधार पर कोई राहत नहीं मिलनी चाहिए।
सुरेन्द्र सिंह रावत
Verified Reporter
Professional journalist writing regular analytical and research reports on key political, cultural, and technological fields globally.
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