देहरादून पुलिस ने फर्जी दस्तावेजों से एमबीबीएस दाखिला रैकेट का भंडाफोड़, दो गिरफ्तार
By सुरेन्द्र सिंह रावत
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Sep 22, 2026 17:31
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देहरादून में नीट-यूजी 2025 में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एमबीबीएस में दाखिला दिलाने के मामले में रायपुर पुलिस ने दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। एसएसपी प्रमेन्द्र सिंह डोबाल ने बताया कि 13 सितंबर 2026 को राजस्व उपनिरीक्षक कंडोली, सदर देहरादून जगदीश सिंह की ओर से थाना रायपुर में शिकायत दी गई। शिकायत में बताया गया कि तीन आवेदनकर्ताओं ने सरकारी पोर्टल पर कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र बनवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। जांच में दस्तावेज फर्जी पाए जाने के बाद मुकदमा दर्ज किया गया। मामले की जांच के लिए पुलिस अधीक्षक ग्रामीण जया बलूनी के नेतृत्व में एसआईटी गठित की गई। एसआईटी ने संबंधित दस्तावेज कब्जे में लेकर जांच शुरू की।
जांच के दौरान दस्तावेजों में दर्ज पते गलत पाए गए।इसके बाद टीम ने संबंधित शैक्षणिक संस्थानों में जाकर मामले से जुड़े दस्तावेजों की जानकारी जुटाई। साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने दो आरोपितों को पूछताछ के लिए रायपुर थाने लाया और बाद में गिरफ्तार कर लिया।पूछताछ में पुलिस को पता चला कि गिरफ्तार आरोपित रूपेश पंडित निवासी ग्राम शिवपुरी थाना केहाट, जिला पूर्णिया बिहार वर्तमान निवासी द्वारिका पूरी कालोनी जनपद मेरठ उत्तर प्रदेश पिछले करीब पांच वर्षों से एजुकेशन कंसल्टेंसी का काम कर रहा था। वह मेरठ में मेकोडो नाम से एक कंपनी संचालित कर रहा था, जिसके माध्यम से विभिन्न प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों और विदेशों में एमबीबीएस, बीटेक, बीडीएस, बीवीआर आदि पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिलाने के लिए कमीशन पर काम करने की बात सामने आई है। दूसरा आरोपित अरविंद कुमार निवासी ग्राम बहादरपुर खादर लक्सर जिला हरिद्वार, रूपेश का पुराना परिचित बताया गया है। अरविंद ने अपनी पुत्री परी का एडमिशन के लिए रूपेश से बात की थी।
जांच में यह भी सामने आया कि तीनों अभ्यर्थियों के लिए एमबीबीएस में प्रवेश के एवज में करीब 45-45 लाख रुपये लेने की बात कही गई थी। अभ्यर्थियों के परिजनों से कथित तौर पर 20-20 लाख रुपये एडवांस लिए गए थे। दाखिला और कक्षाएं शुरू होने के बाद शेष रकम लेने की बात तय होने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, रूपेश ने अपने साथियों के साथ मिलकर अभ्यर्थियों के फर्जी दस्तावेजों के आधार पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र तैयार कराए। इन्हीं प्रमाणपत्रों के आधार पर अभ्यर्थियों ने अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस सीट के लिए आवेदन किया था। एसआईटी मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका और दस्तावेज तैयार करने की पूरी प्रक्रिया की जांच कर रही है। पुलिस ने कहा कि जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर अन्य आरोपितों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
सुरेन्द्र सिंह रावत
Verified Reporter
Professional journalist writing regular analytical and research reports on key political, cultural, and technological fields globally.
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