अल्मोड़ा में कृषि विभाग द्वारा “खेती बचाओ अभियान” के उद्घाटन कार्यक्रम का आयोजन
By सुरेन्द्र सिंह रावत
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Jun 01, 2026 12:11
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कृषि विभाग, अल्मोड़ा द्वारा “खेती बचाओ अभियान” के उद्घाटन कार्यक्रम का आयोजन कृषि विज्ञान केंद्र, मटेला, अल्मोड़ा में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षत...
कृषि विभाग, अल्मोड़ा द्वारा “खेती बचाओ अभियान” के उद्घाटन कार्यक्रम का आयोजन कृषि विज्ञान केंद्र, मटेला, अल्मोड़ा में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता ग्राम उजियारी की प्रगतिशील कृषक तारा देवी ने की, जबकि भाकृअनुप–विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कान्त मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के प्रारंभ में मुख्य कृषि अधिकारी, अल्मोड़ा आनंद गिरी ने कृषि विभाग के अधिकारियों, शोध एवं प्रसारण संस्थानों के वैज्ञानिकों तथा उपस्थित किसानों का स्वागत करते हुए “खेती बचाओ अभियान” के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने रेखांकित किया कि सभी सम्बंधित विभागों और संस्थानों के समन्वित प्रयासों से ही पर्वतीय कृषि को सुदृढ़ बनाया जा सकता है।
अपने संबोधन में कृषि विज्ञान केंद्र, अल्मोड़ा के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. सी. तिवारी ने अभियान की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में मृदा अपरदन खेती के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे ढालदार भूमि पर मृदा एवं जल संरक्षण के उपाय अपनाएँ, फसल अवशेषों एवं जैविक पदार्थों को खेत में ही लौटाएँ तथा समेकित खेती प्रणालियों के माध्यम से भूमि की उत्पादकता और स्थिरता को बढ़ाएँ। मुख्य अतिथि डॉ. लक्ष्मी कान्त ने अपने उद्बोधन में संतुलित एवं वैज्ञानिक उर्वरक प्रबंधन के महत्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि उर्वरकों का प्रयोग मृदा परीक्षण की सिफारिशों के अनुसार, जैविक एवं रासायनिक उर्वरकों के संतुलित संयोजन के साथ किया जाना चाहिए, जिससे लागत में कमी, फसल उत्पादकता में वृद्धि तथा मृदा स्वास्थ्य का संरक्षण सुनिश्चित हो सके।
भाकृअनुप–विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. निर्मल हेडाऊ ने पर्वतीय क्षेत्रों में कुरमुला कीट प्रबंधन के व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी। उन्होंने समय पर जुताई, उपयुक्त फसल चक्र, जैविक एवं रासायनिक नियंत्रण उपायों तथा समेकित कीट प्रबंधन तकनीकों को अपनाने पर बल दिया, ताकि किसान फसल नुकसान को कम कर सकें। गोष्ठी के बाद सभी प्रतिभागियों को प्राकृतिक खेती के प्रक्षेत्र पर विस्तृत जानकारी दी गयी। कार्यक्रम में विभिन्न ग्रामों के 54 से अधिक किसानों और 33 वैज्ञानिक एवं अधिकारियों ने प्रतिभाग किया और खेती बचाओ अभियान के अंतर्गत प्रस्तावित गतिविधियों में सक्रिय सहयोग का आश्वासन दिया। किसानों ने मृदा संरक्षण, उर्वरक प्रबंधन एवं कीट नियंत्रण संबंधी वैज्ञानिक जानकारी को अत्यंत उपयोगी बताया तथा भविष्य में भी इस प्रकार के कार्यक्रमों के आयोजन की अपेक्षा व्यक्त की।
सुरेन्द्र सिंह रावत
Verified Reporter
Professional journalist writing regular analytical and research reports on key political, cultural, and technological fields globally.
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