अल्मोड़ा

माहवारी स्वास्थ्य और विधिक अधिकारों पर एडवोकेट पूर्णिमा जोशी का बड़ा सर्वे; उच्च न्यायालय और सरकार को सौंपी जाएगी रिपोर्ट

सुरेन्द्र सिंह रावत By सुरेन्द्र सिंह रावत Mar 10, 2026 04:22 1 views 0 Comments
माहवारी स्वास्थ्य और विधिक अधिकारों पर एडवोकेट पूर्णिमा जोशी का बड़ा सर्वे; उच्च न्यायालय और सरकार को सौंपी जाएगी रिपोर्ट

अल्मोड़ा में महिलाओं के माहवारी स्वास्थ्य (Menstrual Health) और उनसे जुड़े विधिक अधिकारों को लेकर क्षेत्र की महिला अधिवक्ता पूर्णिमा जोशी ने एक व्याप...


अल्मोड़ा में महिलाओं के माहवारी स्वास्थ्य (Menstrual Health) और उनसे जुड़े विधिक अधिकारों को लेकर क्षेत्र की महिला अधिवक्ता पूर्णिमा जोशी ने एक व्यापक शोध सर्वेक्षण (Legal Survey) पूरा किया है। इस सर्वेक्षण के चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं, जो बताते हैं कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आज भी महिलाएं अपने मौलिक स्वास्थ्य अधिकारों और सरकारी योजनाओं से वंचित हैं। सर्वेक्षण के मुख्य बिंदु:
जागरूकता का अभाव: सर्वे में शामिल [50]% महिलाओं को 'मेंस्ट्रुअल लीव' (माहवारी अवकाश) और संबंधित विधिक प्रावधानों की जानकारी नहीं है।

स्वास्थ्य सुविधाएं: लगभग [45]% महिलाओं ने स्वच्छता और सेनेटरी पैड्स तक पहुंच को एक बड़ी चुनौती बताया।
सामाजिक वर्जनाएं: आज भी [75]% महिलाएं इस विषय पर खुलकर बात करने में संकोच करती हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। अधिवक्ता पूर्णिमा जोशी ने बताया कि इस सर्वे की विस्तृत रिपोर्ट जल्द ही माननीय उच्च न्यायालय (High Court) और राज्य महिला आयोग को एक 'पत्र याचिका' (Letter Petition) के माध्यम से प्रेषित की जाएगी। उनका उद्देश्य है कि कार्यस्थलों और शिक्षण संस्थानों में 'मेंस्ट्रुअल हाइजीन' को लेकर सख्त नीति बने और महिलाओं को उनके कानूनी अधिकार मिलें। "यह केवल एक स्वास्थ्य मुद्दा नहीं है, बल्कि महिलाओं के सम्मान और गरिमा के साथ जीने के संवैधानिक अधिकार (Article 21) का हिस्सा है। हम चाहते हैं कि सरकार इस डेटा के आधार पर ठोस नीतिगत निर्णय ले।" — एडवोकेट पूर्णिमा जोशी

सुरेन्द्र सिंह रावत

सुरेन्द्र सिंह रावत

Verified Reporter

Professional journalist writing regular analytical and research reports on key political, cultural, and technological fields globally.

Enjoyed this article?

Share it with your friends and colleagues.

Comments (0)

No comments yet. Be the first to share your thoughts!

Leave a Comment