सतौन स्पाईस ग्रोवर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भगवान सिंह ने इस अवसर पर कहा कि “संस्थान की यह प्रजाति किसानों की आयवृद्धि में एक मील का पत्थर सिद्ध होगी। इससे न केवल उत्पादकता में वृद्धि होगी, बल्कि उच्च गुणवत्ता वाले लहसुन की उपलब्धता से किसानों को अधिक लाभ प्राप्त होगा। निःसंदेह यह पहल किसानों के आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण योगदान है जिस पर हम सभी गर्व कर सकेंगे।”
संस्थान के निदेशक डॉ0 लक्ष्मी कान्त ने एसोसिएशन के सदस्यों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी और कहा कि “संस्थान सदैव किसानों की बेहतरी और पर्वतीय कृषि की उन्नति के लिए समर्पित है। वी.एल. लहसुन-2 जैसी प्रजातियों के प्रसार से न केवल किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी बल्कि पर्वतीय कृषि उत्पादों की राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान भी सुदृढ़ होगी।”
इस अवसर पर संस्थान के वैज्ञानिकों एवं एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने इस बात पर बल दिया कि इस प्रकार के समझौते से किसानों के लिए नई संभावनाएं उत्पन्न होंगी। तकनीकी सहयोग एवं वैज्ञानिक मार्गदर्शन के साथ यदि किसानों को गुणवत्तायुक्त बीज सामग्री उपलब्ध कराई जाती है तो वे अपने उत्पादन को न केवल बढ़ा पाएंगे, बल्कि उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद के माध्यम से बाजार में उचित मूल्य भी प्राप्त कर सकेंगे।
भाकृअनुप–विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा का यह प्रयास पर्वतीय राज्यों में किसानों की स्थिति सुदृढ़ करने की दिशा में एक सराहनीय कदम है। इस समझौते से किसानों को लहसुन उत्पादन में नई तकनीकों का लाभ मिलेगा, जिससे उनकी आजीविका में स्थिरता आएगी और क्षेत्रीय कृषि अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। संस्थान द्वारा विकसित वी.एल. लहसुन-2 निःसंदेह भविष्य में किसानों की आयवृद्धि एवं कृषि विकास की दिशा में ‘एक मील का पत्थर’ सिद्ध होगी।
