उत्तराखंड में पलायन की पीड़ा, वृद्धा की मौत के बाद शव उठाने पहुंचे दूसरे गांव के लोग

रुद्रप्रयाग में कभी हंसी-ठिठोली और जीवन से भरे ल्वेगढ़ गांव में आज सन्नाटा छा गया है। कांडई की ग्राम पंचायत का यह गांव पलायन की मार झेल रहा है। दो दिन पहले 90 वर्षीय सीता देवी की मृत्यु हुई, लेकिन उनका अंतिम संस्कार उसी दिन नहीं हो सका। गांव में पुरुष बिल्कुल नहीं बचे थे और मृतक के मानसिक रूप से अस्वस्थ बेटे के कारण शव उठाने के लिए कोई उपलब्ध नहीं था। जब नजदीकी गांवों के ग्रामीणों को इसकी जानकारी मिली, तभी जाकर दूसरे दिन वृद्धा का अंतिम संस्कार पैतृक घाट पर किया जा सका।

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15-16 परिवारों वाला यह गांव अब केवल तीन महिलाएं और एक पुरुष ही शेष रह गए हैं। ल्वेगढ़ तक पहुंचने के रास्ते खराब है, सड़क नहीं बनी है और पेयजल की समस्या भी बनी हुई है। स्कूल गांव से 2 से 4 किमी दूर हैं और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध नहीं हैं। ग्राम प्रधान संजय पांडे ने बताया कि उनके कार्यकाल के दौरान रास्तों को सुधारा जाएगा और पेयजल की स्थायी व्यवस्था की जाएगी। जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम कठैत ने कहा कि ल्वेढ़ गांव के लिए सड़क सुधार और पुल निर्माण के प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं।

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विधायक भरत सिंह चौधरी ने बताया कि मरछोला तक सड़क का निर्माण स्वीकृत है। इसके बनने से ल्वेगढ़ की पैदल दूरी कम होगी और गांव सड़क से जुड़ सकेगा। ल्वेढ़ की यह तस्वीर ग्रामीण भारत की उन कठिनाइयों को उजागर करती है, जहां बुनियादी सुविधाओं के अभाव ने जीवन और अस्तित्व को चुनौती दे दिया है।

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