देहरादून में आगामी 17 जुलाई को देहरादून के परेड ग्राउंड में प्रस्तावित राहुल गांधी के कार्यक्रम पर संशय बना हुआ है, कार्यक्रम के लिए प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने 8 जुलाई को अनुमति मांगी थी, जिस पर नगर निगम और जिला प्रशासन ने अनुमति भी दे दी थी, लेकिन अब कार्यक्रम से ठीक तीन दिन पहले ही अनुमति रद्द कर दी गई है, जिससे कांग्रेस के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है कि आखिर राहुल गांधी का कार्यक्रम कहां कराएं? वहीं, मामले में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल का कहना है कि उन्हें कोई लिखित में पत्र नहीं मिला है, 17 जुलाई को कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी के परेड ग्राउंड में होने जा रहे छात्रों के साथ संवाद यानी ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के लिए अब नए सिरे से कांग्रेस के नेता जगह तलाशने में जुट गए हैं, प्रदेश कांग्रेस ने राहुल गांधी के दौरे को लेकर अपनी पूरी तैयारी कर ली थी, छात्रों से संवाद के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवा दिया गया था।
यहां तक कि अपने पोस्टर बैनर भी छपा लिए थे, लेकिन ठीक कार्यक्रम के 72 घंटे पहले प्रशासन ने कार्यक्रम को परेड ग्राउंड में न करने का फैसला लिया है, जिसको चलते कांग्रेस के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है कि आखिर इतने कम समय में वो नया ग्राउंड कहां से ढूंढेंगे? कहां पर कार्यक्रम आयोजन किया जाएगा? यह समस्या खड़ी हो गई है, खास बात ये है कि 14 जुलाई की सुबह टेंट लगाने के लिए तमाम गाड़ियां परेड ग्राउंड पहुंच गई थी, लेकिन इन सभी गाड़ियों को परेड ग्राउंड में जाने की अनुमति नहीं दी गई, जबकि, कांग्रेस की ओर से 8 जुलाई को 15, 16 और 17 जुलाई के लिए ग्राउंड की बुकिंग संबंधित पत्र भेज दिया गया था, साथ ही ग्राउंड बुकिंग के लिए अनुमति भी मांगी गई थी। ऐस में जिला प्रशासन से अनुमति मिलने के बाद कांग्रेस की ओर से न सिर्फ ग्राउंड बुकिंग की फीस जमा कर दिया गया, बल्कि, तय कार्यक्रम के तहत कांग्रेस ने टेंट भी मंगवा लिए, ताकि, समय से ग्राउंड में टेंट लगा दिया जाए, क्योंकि, इस छात्रों की गूंज कार्यक्रम के लिए करीब ढाई लाख युवा रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा अभी जिला प्रशासन की ओर से कोई भी लिखित जानकारी हमें नहीं मिली है लेकिन मौखिक रूप से इस बात को कहा गया है कि कुछ दिक्कतें हैं जो कि कार्यक्रम के लिए पहले अनुमति दी गई थी। गणेश गोदियाल ने आगे कहा कि वैसे सरकार ने राजभवन का नाम बदलकर लोकभवन कर दिया है, ऐसे में सरकार अगर परेड ग्राउंड में परमिशन नहीं देती है, तो फिर हमारे लिए लोकभवन सबसे उपयुक्त है। लोकतंत्र में विपक्ष की रैलियों को रोकने के लिए इस तरह के हथकंडे अपनाना सही नहीं है लेकिन यह सरकार तानाशाही पर विश्वास रखती है, अगर ऐसा निर्णय होता है तो हम इसका मुकाबला भी करेंगे।
