केदारनाथ में वीआईपी दर्शन पर तीर्थपुरोहित भड़के, गेट बंद कराने की मांग को लेकर प्रदर्शन

केदारनाथ में वीआईपी सिस्टम और वीआईपी गेट बंद करने की मांग को लेकर तीर्थपुरोहितों ने प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि इससे आम श्रद्धालुओं को दर्शन करने में असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच उन्होंने बीकेटीसी अध्यक्ष के सम्मुख अपनी बात को रखा। हालांकि बाद में तीर्थपुरोहित और बीकेटीसी अध्यक्ष के बीच बातचीत हुई। जिसके बाद मामला शांत हो गया। केदारनाथ में कुछ लोग वीआईपी गेट से अंदर जाने का प्रयास कर रहे थे। इसी बीच तीर्थपुरोहितों को किसी ने ऐसी सूचना दी गई कि उन्हें भी अंदर जाने से मना किया जा रहा है। इसी बात को लेकर तीर्थपुरोहित आक्रोशित हो गए। करीब पचास तीर्थपुरोहित मंदिर के वीआईपी गेट के समीप नारेबजी करने लगे। आक्रोशित तीर्थपुरोहितों ने वीआईपी गेट बंद करो, वीआईपी सिस्टम बंद करो के नारे लगाए। तीर्थ पुरोहितों ने कहा इससे श्रद्धालुओं को परेशानी होती है। करीब डेढ़ घंटे यह मामला चलता रहा।

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केदारनाथ धाम में मौजूद बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी मौके पर आए। उन्होंने तीर्थपुरोहितों से वार्ता की। तीर्थपुरोहितों की जिस बात को लेकर नाराजगी थी। उन्हें समझाया गया कि किसी के द्वारा कुछ नहीं कहा गया। तीर्थपुरोहितों के अंदर न जाने को लेकर जब असमंजस्य खत्म हुआ। तब जाकर उनका आक्रोश थमा। केदार सभा के अध्यक्ष राजकुमार तिवारी ने बताया कि गलतफहमी के कारण कुछ तीर्थपुरोहित नारेबाजी करने लगे किंतु बाद में अध्यक्ष के मौके पर आने पर मामला शांत हो गया। बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि वीआईपी की आड़ में कुछ लोगों ने वीआईपी गेट से अंदर जाने का प्रयास किया गया जिससे यह स्थिति पैदा हुई। द्विवेदी ने कहा कि यात्रा प्रबंधन सुव्यवस्थित रूप से हो रहा है। तीर्थपुरोहितों, मंदिर समिति, प्रशासन के बीच समन्वय बना हुआ है। किसी प्रकार का मतभेद नहीं है। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने भी कपाट खुलने पर सामान्य श्रद्धालु की तरह दर्शन किए। प्रसिद्ध उद्योगपति गौतम अडानी ने भी तय प्रोटोकॉल में ही दर्शन किए। वीआईपी जैसी कोई व्यवस्था नहीं है।

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केदारनाथ में तीर्थ पुरोहितों को मंदिर में प्रवेश से रोके जाने के मामले में सम्बन्धित पुलिस अधिकारियों को हटा दिया गया है। बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि भ्रम फैलने से जो स्थिति पैदा हुई थी, उसे दूर कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद तीर्थपुरोहितों की प्रतिक्रिया स्वाभाविक थी। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए एसपी रुद्रप्रयाग से समन्वय स्थापित किया गया। इसके बाद संबंधित सीओ और उपनिरीक्षक को मंदिर ड्यूटी से हटा दिया गया है।

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