उधम सिंह नगर पुलिस ने नाबालिग लड़की से रेप के मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, आईटीआई कोतवाली पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम ने सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर दोनों आरोपियों को अरेस्ट किया है, पुलिस अब दोनों के आपराधिक इतिहास की जांच में जुटी है, उत्तराखंड के काशीपुर क्षेत्र में नाबालिग से दुष्कर्म की घटना ने इलाके में भारी आक्रोश पैदा कर दिया था, इस मामले में आईटीआई कोतवाली पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, पूरे मामले का खुलासा एसपी काशीपुर स्वप्न किशोर सिंह ने देर शाम प्रेस वार्ता में कर किया, जानकारी के मुताबिक बीते 10 अप्रैल को पीड़िता की मां ने आईटीआई कोतवाली में तहरीर देकर शिकायत दर्ज कराई थी।
बताया गया कि तीन अप्रैल को उसकी नाबालिग बेटी चैती मेला देखने गई थी, इसी दौरान अज्ञात व्यक्तियों ने उसे बहला-फुसलाकर अपने साथ बाइक पर बैठा लिया और बांसखेड़ा के पास बने एक ओवरब्रिज के नीचे ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन तुरंत हरकत में आया, एसपी स्वप्न किशोर सिंह के निर्देश पर आईटीआई कोतवाली में पॉक्सो अधिनियम के तहत अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया, साथ ही आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी के लिए आईटीआई पुलिस और स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) की संयुक्त टीम का गठन किया गया, जांच के दौरान पुलिस ने तकनीक का सहारा लिया, चैती मेले में लगे करीब 120 सीसीटीवी कैमरों के अलावा कोतवाली आईटीआई, कोतवाली काशीपुर और आसपास के सीमावर्ती क्षेत्रों के लगभग 150 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई, इसके साथ ही संदिग्ध गतिविधियों को ट्रैक करने के लिए सैकड़ों मोबाइल नंबरों की सर्विलांस और तकनीकी जांच भी की गई।
लगातार जांच और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने आरोपियों के मूवमेंट को ट्रैक किया, पीड़िता की पहचान के आधार पर दोनों संदिग्धों को चिन्हित किया गया और अंतत गिरफ्तार कर लिया गया, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान पंकज कुमार पुत्र संतोष कुमार निवासी ग्राम बोहरनपुर कला, थाना भगतपुर, जिला मुरादाबाद (हाल निवासी कृष्णा कॉलोनी, पैगा चौकी, कोतवाली आईटीआई) और अरविंद पुत्र महिपाल निवासी ग्राम बोहरनपुर कला, थाना भगतपुर, जिला मुरादाबाद के रूप में हुई है, पुलिस के अनुसार दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और उनके आपराधिक इतिहास की भी जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वे पहले भी किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल रहे हैं या नहीं।
