उत्तराखंड में स्मार्ट मीटरों में खामियों का सिलसिला जारी है, जिससे ऊर्जा विभाग चिंतित है, गढ़वाल क्षेत्र में सबसे अधिक
By सुरेन्द्र सिंह रावत
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Apr 27, 2026 01:57
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स्मार्ट मीटर में खामियां निकलने की रफ्तार पहाड़ पर भी कम नहीं है। रुद्रप्रयाग से लेकर भिकियासैंण हो या गैरसैंण व गोपेश्वर। पहाड़ के हर कोने पर स्मार्...
स्मार्ट मीटर में खामियां निकलने की रफ्तार पहाड़ पर भी कम नहीं है। रुद्रप्रयाग से लेकर भिकियासैंण हो या गैरसैंण व गोपेश्वर। पहाड़ के हर कोने पर स्मार्ट मीटर में खामियों के मामले सामने आ रहे हैं। इससे ऊर्जा विभाग की चिंता बढ़ी हुई है। गढ़वाल इस समस्या से सबसे अधिक प्रभावित है। इस जोन के कई जिलों में पांच से सात प्रतिशत मीटर डिफेक्टिव निकले हैं। कुमाऊं जोन में स्थिति बेहतर है, लेकिन पूरी तरह संतोषजनक भी नहीं। हरिद्वार जोन की स्थिति सबसे अच्छी है, यहां अधिकांश डिवीजन में दो प्रतिशत के आसपास मीटर डिफेक्टिव पाए गए हैं। ऊर्जा विभाग का मानना है कि डिफेक्टिव मीटर का प्रतिशत बढ़ने से सीधा असर राजस्व पर पड़ता है, क्योंकि डिफेक्टिव मीटर के कारण सही बिलिंग नहीं हो पाती और करोड़ों रुपये तक का नुकसान हो सकता है।
इसके साथ ही उपभोक्ताओं को औसत बिलिंग का सामना करना पड़ता है, जिससे शिकायतें और विवाद बढ़ते हैं। डिफेक्टिव मीटर बिजली चोरी को भी बढ़ावा दे सकते हैं, जिससे लाइन लास और अन्य नुकसान में इजाफा होता है। ऊर्जा विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती गढ़वाल जोन में स्थिति को नियंत्रित करना है। विभाग ने ऐसे मीटर्स बदलने व फील्ड निगरानी तेज करने के निर्देश दिए हैं। यह मामला सिर्फ राजस्व की क्षति से नहीं बल्कि उपभोक्ताओं के भरोसे से भी जुड़ा है। स्मार्ट मीटर को लेकर पहले ही उपभोक्ताओं के मन में कई तरह की शंकायें हैं, ऐसे में डिफेक्टिव मीटर उपभोक्ता के भरोसे को कमजोर कर देता है।
सुरेन्द्र सिंह रावत
Verified Reporter
Professional journalist writing regular analytical and research reports on key political, cultural, and technological fields globally.
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