उत्तराखंड

देहरादून में एसबीआई के एटीएम से कैश नहीं निकले, लेकिन कटे रुपए, 20 हजार की जगह भरने पड़े करीब डेढ़ लाख रुपए

सुरेन्द्र सिंह रावत By सुरेन्द्र सिंह रावत Mar 12, 2026 11:02 1 views 0 Comments
देहरादून में एसबीआई के एटीएम से कैश नहीं निकले, लेकिन कटे रुपए, 20 हजार की जगह भरने पड़े करीब डेढ़ लाख रुपए

उत्तराखंड में एसबीआई यानी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को एक छोटी सी गलती की वजह से भारी भरकम रकम अदा करनी पड़ी है, डालनवाला निवासी एक व्यक्ति ने 20 हजार रुप...

उत्तराखंड में एसबीआई यानी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को एक छोटी सी गलती की वजह से भारी भरकम रकम अदा करनी पड़ी है, डालनवाला निवासी एक व्यक्ति ने 20 हजार रुपए की गड़बड़ी को लेकर एसबीआई बैंक के खिलाफ तीन साल तक कानूनी लड़ाई लड़ी, आखिरकार देहरादून जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बैंक को 20 हजार रुपए की गड़बड़ी पर एक लाख 49 हजार रुपए का हर्जाना भरने का आदेश दिया। जानकारी के मुताबिक, बीती 23 फरवरी 2022 को देहरादून के डालनवाला निवासी गुरवंत ने एसबीआई (SBI) के एटीएम (ATM) से 10 हजार रुपए निकालने के लिए कार्ड स्वाइप किया था, लेकिन उस समय न तो रुपए निकले, न ही रुपए कटने का कोई एसएमएस (SMS) उनके पास आया, ऐसे में वो तकनीकी गड़बड़ी समझ कर एटीएम से लौट गए, इसके बाद पता चला कि 3 और 4 मार्च को उनके खाते से अचानक 20 हजार रुपए डेबिट हो गए।

इसके बाद गुरवंत ने आनन-फानन में बैंक में शिकायत की, लेकिन अधिकारियों ने कह दिया कि उनकी लॉग रिपोर्ट में कैश निकला हुआ है. ऐसे में बैंक इस मामले में कुछ नहीं कर सकता, इस रवैये के खिलाफ गुरवंत ने दिसंबर 2022 में देहरादून जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग की शरण ली, फोरम ने बैंक से ट्रांजेक्शन सफल होने के ठोस सबूत मांगे, लेकिन बैंक ये साबित नहीं कर सका कि रुपए वास्तव में गुरवंत सिंह के हाथ में पहुंचे थे। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंह खरे और सदस्य अलका नेगी की पीठ ने कहा कि बैंक केवल अपनी इंटरनल मशीनी रिपोर्ट के आधार पर उपभोक्ता दावे को खारिज नहीं कर सकता, आयोग ने आरबीआई की गाइडलाइन का हवाला दिया, जिसके मुताबिक शिकायत दर्ज होने के 7 कार्य दिनों के भीतर अगर बैंक समाधान नहीं करता तो उसे 100 प्रतिदिन का हर्जाना देना होगा।

वहीं, उपभोक्ता आयोग में शिकायत 4 मार्च 2022 को हुई थी. 7 दिन बाद अगली 11 मार्च से पांच अगस्त 2025 (फैसले की तारीख) तक 1,243 दिन बीत चुके थे, ऐसे में आयोग ने 100 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से कुल 1,24,300 रुपए विलंब शुल्क लगाया. साथ ही खाते से काटे गए 20 हजार रुपए लौटाने का भी आदेश दिया, इसके अलावा मानसिक उत्पीड़न और कानूनी खर्च के 5 हजार रुपए अलग से चुकाने का आदेश दिया, इस तरह बैंक पर 1.49 लाख का हर्जाना लगा गया।

सुरेन्द्र सिंह रावत

सुरेन्द्र सिंह रावत

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Professional journalist writing regular analytical and research reports on key political, cultural, and technological fields globally.

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