उत्तराखंड

यूपी में बिजली सेक्टर के निजीकरण को लेकर, उत्‍तराखंड में भी विरोध तेज,नौ जुलाई को हड़ताल का एलान

सुरेन्द्र सिंह रावत By सुरेन्द्र सिंह रावत Jul 02, 2025 17:27 1 views 0 Comments
यूपी में बिजली सेक्टर के निजीकरण को लेकर, उत्‍तराखंड में भी विरोध तेज,नौ जुलाई को हड़ताल का एलान

देहरादून में उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के प्रस्तावित निजीकरण के खिलाफ उत्तराखंड के बिजली कार्मिक भी मुखर हो गए है...

देहरादून में उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के प्रस्तावित निजीकरण के खिलाफ उत्तराखंड के बिजली कार्मिक भी मुखर हो गए हैं। उत्तराखंड पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन के बैनर तले देहरादून में अभियंताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स के आह्वान पर किया गया, जो देशभर में निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन का हिस्सा है। इसी के तहत संगठन ने आगामी नौ जुलाई को हड़ताल का एलान किया है।

बुधवार को उत्तराखंड के अभियंताओं ने इस फैसले को बिजली क्षेत्र में आम जनता के खिलाफ बताया और चेतावनी दी कि यदि निजीकरण लागू हुआ तो इससे गरीब उपभोक्ताओं को भारी आर्थिक बोझ उठाना पड़ेगा।

आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे और महासचिव पी रत्नाकर राव ने उत्तर प्रदेश सरकार पर आरोप लगाया कि घाटे के भ्रामक आंकड़ों का हवाला देकर निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार के विभागों पर 14 हजार चार सौ करोड़ रुपये का बकाया बिजली बिल है, जिसे छुपाकर निजीकरण को तर्कसंगत दिखाया जा रहा है।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि निजीकरण के बाद सब्सिडी खत्म हो जाएगी और उपभोक्ताओं को 10 से 12 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदनी पड़ेगी। इसका सीधा असर निम्न और मध्यम वर्गीय उपभोक्ताओं पर पड़ेगा, जिन्हें मजबूर होकर लालटेन युग में लौटना पड़ सकता है। देहरादून में हुए प्रदर्शन में उत्तराखंड पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष विवेक राजपूत, अभियंता जसवंत सिंह, एनएस बिष्ट, उपाध्यक्ष सौरभ पांडे, मोहित डबराल, प्रदीप पंत, बृजेश यादव, सुभाष कुमार, धनंजय कुमार आदि उपस्थित रहे।

सुरेन्द्र सिंह रावत

सुरेन्द्र सिंह रावत

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Professional journalist writing regular analytical and research reports on key political, cultural, and technological fields globally.

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