पद्मश्री पुरस्कार हिंदी साहित्य साधक कैलाश पंत की छह दशकों की तपस्या को सम्मान, पैतृक गांव में जश्न
By सुरेन्द्र सिंह रावत
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Jan 26, 2026 02:05
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बागेश्वर के हिंदी साहित्य, पत्रकारिता तथा सांस्कृतिक चेतना के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान रखने वाले साहित्यकार कैलाश चंद्र पंत के नाम पद्म पुरस्कार के...
बागेश्वर के हिंदी साहित्य, पत्रकारिता तथा सांस्कृतिक चेतना के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान रखने वाले साहित्यकार कैलाश चंद्र पंत के नाम पद्म पुरस्कार के लिए घोषित होने पर उनके पैतृक गांव खंतोली में खुशी की लहर दौड़ गई है। गांववासियों ने इसे पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का क्षण बताया है। मूल रूप से उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के खंतोली गांव निवासी कैलाश चंद्र पंत का जन्म 26 अप्रैल 1936 को महू, जिला इंदौर (मध्य प्रदेश) में हुआ। उनके पिता स्व. लीलाधर पंत तथा माता हरिप्रिया पंत का परिवार लगभग 50 वर्ष पूर्व रोजगार के सिलसिले में मध्य प्रदेश चला गया था।
यद्यपि उनका अधिकांश जीवन मध्य प्रदेश में ही व्यतीत हुआ, लेकिन उनकी पहचान खंतोली गांव से ही जुड़ी रही। उन्होंने साहित्याचार्य एवं साहित्य रत्न की उपाधि प्राप्त कर हिंदी भाषा की सेवा को जीवन का लक्ष्य बनाया। छह दशकों से अधिक समय तक उन्होंने अध्यापन, लेखन, संपादन तथा संगठनात्मक दायित्वों के माध्यम से हिंदी साहित्य को समृद्ध किया। अपने साहित्यिक जीवन में पंत ने यूनियन थियोलाजिकल सेमिनरी, इंदौर में व्याख्याता (1957-59) के रूप में सेवाएं दीं। इसके बाद पंचायत राज प्रशिक्षण केंद्र, भोपाल में प्राचार्य (1963-71) रहे। विद्या भवन, उदयपुर में प्रकाशन प्रमुख तथा दैनिक इंदौर समाचार के संवाददाता के रूप में भी उन्होंने कार्य किया।
पत्रकारिता और साहित्य संपादन में उनका योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा है। वह शिक्षा प्रदीप, जनधर्म, दुरगामी आह्वान जैसी प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं के संपादक रहे। वर्ष 2003 से वह द्वैमासिक पत्रिका अक्षरा का निरंतर संपादन कर रहे हैं। अब तक उनके लगभग 800 लेख विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं, जिनमें साहित्यिक, सामाजिक तथा राजनीतिक विषयों पर गहन चिंतन देखने को मिलता है। कैलाश चंद्र पंत की प्रमुख पुस्तकों में कौन किसका आदमी, धुंध के आर-पार, शब्द का विचार-पथ तथा शैलेश मटियानी: सृजन यात्रा शामिल हैं। उन्होंने हिंदी भवन में व्याख्यान मालाओं की परंपरा को सशक्त किया और युवा रचनाकारों को मंच उपलब्ध कराया। भारत कृषक समाज, राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, मध्यभारत हिंदी साहित्य समिति सहित अनेक संस्थाओं में उन्होंने संस्थापक, सचिव, उपाध्यक्ष और संरक्षक जैसे दायित्व निभाए।
सुरेन्द्र सिंह रावत
Verified Reporter
Professional journalist writing regular analytical and research reports on key political, cultural, and technological fields globally.
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