उत्तराखंड के 117 मदरसों में बाहरी बच्चों को नहीं मिलेगा दाखिला, वक्फ बोर्ड ने सख्त किए नियम
By सुरेन्द्र सिंह रावत
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May 15, 2026 12:39
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उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने प्रदेश में संचालित मदरसों को लेकर बड़ा निर्णय लिया है। बोर्ड अध्यक्ष शादाब शम्स ने घोषणा की है कि अब वक्फ बोर्ड के अधीन चल रह...
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने प्रदेश में संचालित मदरसों को लेकर बड़ा निर्णय लिया है। बोर्ड अध्यक्ष शादाब शम्स ने घोषणा की है कि अब वक्फ बोर्ड के अधीन चल रहे 117 मदरसों में दूसरे राज्यों से आने वाले नए छात्रों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। बोर्ड का कहना है कि उसका मुख्य फोकस उत्तराखंड के बच्चों को आधुनिक और बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराना है। UK360 न्यूज से बातचीत में शादाब शम्स ने कहा कि बाहरी राज्यों से आने वाले छात्रों की पृष्ठभूमि और दस्तावेजों की पूरी जांच करना आसान नहीं होता। बोर्ड के पास सीमित संसाधन हैं, इसलिए फिलहाल स्थानीय बच्चों की शिक्षा और सुविधाओं को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया है। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर भी तेजी से चर्चा में है।
पुष्कर सिंह धामी कैबिनेट ने अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों की मान्यता नियमावली-2026 को मंजूरी दे दी है। नई व्यवस्था के तहत राज्य में संचालित मदरसों और अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता और नवीनीकरण के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। यह नियमावली उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक-2025 के तहत तैयार की गई है। इसमें मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन और पारसी समुदायों के संस्थानों के लिए आवेदन, मान्यता और निरीक्षण से जुड़े नियम तय किए गए हैं। नई व्यवस्था के मुताबिक संस्थानों को तय पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन के साथ जरूरी दस्तावेज और निर्धारित शुल्क जमा करना अनिवार्य रहेगा। मान्यता मिलने के बाद उसकी वैधता तीन शैक्षणिक वर्षों तक होगी। नवीनीकरण के लिए संस्थानों को अवधि खत्म होने से कम से कम तीन महीने पहले आवेदन करना होगा।
मान्यता देने से पहले संस्थान की जमीन, आर्थिक स्थिति, स्टाफ की योग्यता और अल्पसंख्यक हितों से जुड़े पहलुओं की जांच की जाएगी। इसके लिए पंजीकरण प्रमाणपत्र, प्रबंधन समिति का विवरण, बैंक रिकॉर्ड और शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता से जुड़े दस्तावेज जमा करने होंगे। इसके अलावा संस्थानों को सामाजिक सौहार्द बनाए रखने और अपने अल्पसंख्यक स्वरूप से संबंधित घोषणा भी देनी होगी। उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण को संस्थानों का निरीक्षण करने और नियमों के पालन की समीक्षा करने का अधिकार दिया गया है। यदि किसी संस्थान में नियमों के उल्लंघन या फंड के दुरुपयोग की शिकायत मिलती है तो सुनवाई के बाद उसकी मान्यता रद्द की जा सकती है।
सुरेन्द्र सिंह रावत
Verified Reporter
Professional journalist writing regular analytical and research reports on key political, cultural, and technological fields globally.
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