उत्तराखंड

चमोली में दैवीय आपदा का डरावना दृश्य, पीड़ितों की जुबानी ऐसा लगा मानो बम फटा,सहमे लोग

सुरेन्द्र सिंह रावत By सुरेन्द्र सिंह रावत Aug 25, 2025 17:07 1 views 0 Comments
चमोली में दैवीय आपदा का डरावना दृश्य, पीड़ितों की जुबानी ऐसा लगा मानो बम फटा,सहमे लोग

चमोली जिले के थराली में 22 अगस्त की रात आए सैलाब के संकेत शाम छह बजे शुरू हुई बारिश के बाद ही मिलने लगे थे। पीड़ितों की मानें तो उन्होंने ऐसी बारिश प...

चमोली जिले के थराली में 22 अगस्त की रात आए सैलाब के संकेत शाम छह बजे शुरू हुई बारिश के बाद ही मिलने लगे थे। पीड़ितों की मानें तो उन्होंने ऐसी बारिश पहले कभी नहीं देखी। रात करीब साढ़े 12 बजे भयंकर धमाके के साथ तेज बहाव में आए मलबे ने तबाही के रूप में थराली कस्बे में दस्तक दी। वक्त रहते ऊपरी क्षेत्र में बसे टुनरी गांव के लोगों ने फोन कर सचेत कर दिया, जिससे अधिक जनहानि होने से बच गई लेकिन लोगों की जीवनभर की कमाई से खड़े मकान-दुकान जमींदोज हो गए। उन्हें अब इस आपदा से उबरने में सालों लगेंगे। ‘हिन्दुस्तान’ के संवाददाता विनोद मुसान और क्रांति भट्ट ने कुछ आपदा पीड़ितों से बात कर उनका दर्द जाना।

Advertisement

थराली के बलवीर रावत बताते हैं, पड़ोस में रहने वाले वकील साहब जय सिंह बिष्ट जी समय पर आवाज देकर न उठाते तो पता नहीं क्या होता। हम तो गहरी नींद में थे। आधी रात को जब मलबे के साथ पानी का सैलाब आया तो बाहर वकील साहब के जोर-जोर से चिल्लाने की आवाज सुनाई दी।

धमाका इतना तेज था कि मानो बम फटा हो। अब बहुत तेजी के साथ बाहर की ओर भागे, बस यही दो मिनट थे, जब जान बच गई। घर के ऊपर की ओर से मलबा आया। सारा सामान बर्बाद हो गया। दो बालिका और एक बालक घर पर ही थे। पत्नी किसी काम से दिल्ली गई थीं। मेरी तो दुकान भी बर्बाद हो गई। आसपास की दुकानें भी तहस-नहस हो गईं। बोले, सीएम धामी ने बुलाया है। उनके सामने अपनी विपदा रखूंगा। आगे का जीवन कैसे चलेगा, अब जब सबकुछ तबाह हो गया है। वहीं गंगा सिंह बिष्ट के भी घर में दरारें आ गई हैं। भीतर मलबा भरा पड़ा है। उनकी 80 वर्षीय माता जी साथ में रहती हैं, बेटा देहरादून में पढ़ता है।

आपदा के समय स्थानीय लोग एक-दूसरे की मदद करते हुए सुरक्षित स्थानों की ओर भागे। कई लोग कुलसारी पॉलिटेक्निक तक पहुंचे और वहीं सुरक्षित हुए। प्रशासन ने मलबे को हटाने और क्षतिग्रस्त संरचनाओं की मरम्मत के लिए कार्य शुरू कर दिया है।स्थानीय लोग अब जिंदगी को पटरी पर लाने और नुकसान की भरपाई करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। जय सिंह बिष्ट और दर्शन सिंह ने बताया कि इस भयंकर आपदा ने उनकी जिंदगी और व्यवसाय को तहस-नहस कर दिया है और आगे आने वाले समय में जीवन और परिवार की जिम्मेदारियों को संभालना चुनौतीपूर्ण होगा।

सुरेन्द्र सिंह रावत

सुरेन्द्र सिंह रावत

Verified Reporter

Professional journalist writing regular analytical and research reports on key political, cultural, and technological fields globally.

Enjoyed this article?

Share it with your friends and colleagues.

Comments (0)

No comments yet. Be the first to share your thoughts!

Leave a Comment