होमगार्ड वर्दी घोटाला,जांच शुरू, डिप्टी कमांडेंट पर एक करोड़ का सामान तीन करोड़ में खरीदने का आरोप
By सुरेन्द्र सिंह रावत
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Jan 21, 2026 08:35
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होमगार्ड विभाग में वर्दी घोटाले की गृह विभाग ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर जांच शुरू कर दी है। घोटाले का आरोप डिप्टी कमांडेंट जनरल अम...
होमगार्ड विभाग में वर्दी घोटाले की गृह विभाग ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर जांच शुरू कर दी है। घोटाले का आरोप डिप्टी कमांडेंट जनरल अमिताभ श्रीवास्तव पर है। आरोप है कि उन्होंने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करते हुए एक करोड़ रुपये का वर्दी व अन्य सामान तीन करोड़ रुपये में खरीदा है। कमांडेंट जनरल पीवीके प्रसाद ने विभागीय जांच कराने के बाद श्रीवास्तव की बर्खास्तगी और उनसे दो करोड़ रुपये की रिकवरी करने की संस्तुति करते हुए शासन को लिखा था।
गृह सचिव शैलेश बगौली ने बताया कि इस मामले में 15 दिन पहले कमांडेंट जनरल होमगार्ड का पत्र मिला था। इसमें बताया गया था कि अमिताभ श्रीवास्तव ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए वित्तीय अनियमितताएं की हैं। इस मामले की जांच के लिए शासन स्तर के अधिकारियों की टीम बनाई गई है। आरोप है कि जवानों के लिए एक करोड़ रुपये की वर्दी तीन करोड़ रुपये में खरीदी गई। इस मामले में जांच शुरू कर दी गई है। जल्द ही जांच पूरी करने के बाद अगली कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि ये अनियमितताएं वित्तीय वर्ष 2024-25 में हुई है। वर्ष 2025-26 में फिर इन दरों पर टेंडर निकाला गया तो तब कमांडेंट जनरल पीवीके प्रसाद ने यह बात पकड़ ली। उन्होंने टेंडर निरस्त कराते हुए घपले के आरोपी डिप्टी कमांडेंट जनरल (डीसीजी) अमिताभ श्रीवास्तव के खिलाफ केस दर्ज कराने, दो करोड़ रुपये की रिकवरी करने और सेवा से बर्खास्त करने की रिपोर्ट शासन को भेजी है।
विभागीय जांच में सामने आया है कि डीसीजी अमिताभ श्रीवास्तव ने ठेकेदार के साथ मिलीभगत कर बाजार भाव से तीन गुना दामों पर सामान की खरीद की। इस घोटाले के सामने आने के बाद कमांडेंट जनरल ने विभाग में वर्दी की खरीद पर रोक लगा दी है। अधिकारियों और ठेकेदार के गठजोड़ ने एक करोड़ के सामान का बिल तीन करोड़ रुपये बनाया। इसमें 2024-25 के रेट पर ही टेंडर जारी किया गया था। 130 रुपये का डंडे की कीमत 375, 500 रुपये जूते की कीमत 1500 रुपये, 1200 रुपये की पैंट-शर्ट 3000 रुपये और 500 रुपये की जैकेट 1580 रुपये में खरीदी गई। डीजी ने जब बाजार भाव और टेंडर के रेट में जमीन-आसमान का अंतर देखा तो उनका माथा ठनका। उन्होंने तुरंत जांच टीम गठित की। टीम ने जब बाजार से कोटेशन लिए तो पता चला कि विभाग में हर सामान करीब तीन गुना दाम पर खरीदा जा रहा था।
सुरेन्द्र सिंह रावत
Verified Reporter
Professional journalist writing regular analytical and research reports on key political, cultural, and technological fields globally.
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