गैरसैंण में प्रश्नकाल के दौरान वन मंत्री सुबोध उनियाल से तीखे सवाल, सदन में गूंजा मानव-वन्य जीव संघर्ष का मुद्दा
By सुरेन्द्र सिंह रावत
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Mar 10, 2026 10:54
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उत्तराखंड की गीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में बजट सत्र के दूसरे दिन प्रश्नकाल के दौरान वन विभाग से जुड़े मुद्दों पर जमकर चर्...
उत्तराखंड की गीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में बजट सत्र के दूसरे दिन प्रश्नकाल के दौरान वन विभाग से जुड़े मुद्दों पर जमकर चर्चा हुई, मानव-वन्य जीव संघर्ष, मुआवजा, रोपवे परियोजना और वन कानूनों को लेकर सत्ता और विपक्ष दोनों के विधायकों ने वन मंत्री सुबोध से तीखे सवाल किए, उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन भराड़ीसैंण में प्रश्नकाल की शुरुआत होते ही वन विभाग से जुड़े मुद्दों पर सदन में गरमागरम बहस देखने को मिली, अधिकांश सवाल वन मंत्री सुबोध उनियाल से पूछे गए, जिनमें मानव-वन्य जीव संघर्ष, फॉरेस्ट क्लीयरेंस, जंगली जानवरों से फसल नुकसान और रोपवे परियोजनाओं जैसे विषय शामिल रहे।
सबसे पहले डोईवाला के बीजेपी विधायक बृजभूषण गैरोला ने प्रदेश में बढ़ते मानव-वन्य जीव संघर्ष का मुद्दा उठाया और वन मंत्री सुबोध उनियाल से सवाल किया, उन्होंने पूछा कि वन्य जीवों के हमलों से अब तक कितने लोग प्रभावित हुए हैं और सरकार सुरक्षा के लिए क्या कदम उठा रही है? साथ ही प्रभावित लोगों को मिलने वाले मुआवजे और उसमें होने वाली देरी पर भी सवाल किया गया, जवाब में वन मंत्री सुबोध उनियाल ने सदन को बताया कि वर्ष 2000 से 31 जनवरी 2026 तक प्रदेश में मानव-वन्य जीव संघर्ष की घटनाओं में 1296 लोगों की मौत हुई है, जबकि 6624 लोग घायल हुए हैं। मंत्री ने बताया कि सरकार ने ऐसे मामलों में मुआवजे की राशि बढ़ाई है और मृतकों के परिजनों को अब 10 लाख रुपये तक की सहायता दी जा रही है, हालांकि मुआवजा वितरण में देरी को लेकर कांग्रेस के विधायकों ने सरकार को घेरा।
इसी दौरान यमुनोत्री विधायक संजय डोभाल ने यमुनोत्री-खरसाली रोपवे परियोजना को लेकर सवाल उठाया, इस पर संसदीय कार्य मंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि परियोजना के लिए नई कंपनी को टेंडर दिया गया है और जल्द ही काम को आगे बढ़ाया जाएगा। वहीं भाजपा विधायक खजान दास ने वन कानूनों को लेकर सरकार से सवाल किया, उन्होंने कहा कि क्या देश के अलग-अलग राज्यों में वन कानून अलग-अलग तरह से लागू होते हैं और उदाहरण के तौर पर हिमाचल प्रदेश का जिक्र किया, इस पर सदन में कांग्रेस विधायकों ने भी चुटकी ली। खजान दास ने यह भी पूछा कि उत्तराखंड में सड़कों से जुड़े कई प्रोजेक्ट वर्षों तक फॉरेस्ट क्लीयरेंस के कारण क्यों अटके रहते हैं? इसके जवाब में वन मंत्री ने कहा कि पिछले कुछ समय में फॉरेस्ट क्लीयरेंस की प्रक्रिया में तेजी आई है, सरकार की ओर से दिए गए आंकड़ों के अनुसार पिछले साल PWD, पेयजल और विद्युत सहित छह विभागों से जुड़े 713 प्रकरणों में स्वीकृति दी गई है। सदन में पहाड़ी क्षेत्रों में जंगली जानवरों से कृषि को हो रहे नुकसान का मुद्दा भी जोर-शोर से उठा, विधायक खजान दास, महेश जीना और विनोद कंडारी ने इस विषय पर सरकार से ठोस कार्रवाई की मांग की और कहा कि जंगली जानवरों से फसलें बर्बाद हो रही हैं, जिससे ग्रामीणों की आजीविका प्रभावित हो रही है।
वहीं वन (संरक्षण) अधिनियम और वनों से जुड़े स्थानीय लोगों के हक-हकूक को लेकर भी सदन में बहस हुई, इस दौरान भाजपा विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने सरकार से पॉइंटेड सवाल पूछे, मंत्री की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर विधानसभा अध्यक्ष को भी हस्तक्षेप करना पड़ा, स्पीकर ऋतु खंडूड़ी ने वन मंत्री से कहा कि यह प्रदेश के ज्वलंत मुद्दे हैं, इसलिए इन पर गंभीरता के साथ स्पष्ट जवाब दिया जाए, खास बात यह रही कि आज केवल विपक्ष ही नहीं बल्कि सत्ता पक्ष के वरिष्ठ विधायक खजान दास, विनोद चमोली और मुन्ना सिंह चौहान भी कई मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगते नजर आए, सवालों की बौछार के बीच वन मंत्री सुबोध उनियाल को कई बार स्पष्टीकरण देना पड़ा, जिससे प्रश्नकाल के दौरान सदन का माहौल काफी गर्म रहा।
सुरेन्द्र सिंह रावत
Verified Reporter
Professional journalist writing regular analytical and research reports on key political, cultural, and technological fields globally.
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