उत्तराखंड

उत्तराखंड में ट्रांसफर के लिए फर्जी मेडिकल नहीं आएगा काम, मेडिकल बोर्ड दोबारा करेगा जांच, गंभीर बीमारों को लेना होगा VRS

सुरेन्द्र सिंह रावत By सुरेन्द्र सिंह रावत Jul 07, 2026 10:50 1 views 0 Comments
उत्तराखंड में ट्रांसफर के लिए फर्जी मेडिकल नहीं आएगा काम, मेडिकल बोर्ड दोबारा करेगा जांच, गंभीर बीमारों को लेना होगा VRS

उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा विभाग में मेडिकल प्रमाण पत्रों के आधार पर ट्रांसफर की चाह रहने वाले शिक्षकों को अब अनुरोध के आधार पर ट्रांसफर नहीं मिलेगा,...

उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा विभाग में मेडिकल प्रमाण पत्रों के आधार पर ट्रांसफर की चाह रहने वाले शिक्षकों को अब अनुरोध के आधार पर ट्रांसफर नहीं मिलेगा, क्योंकि पिछले कुछ सालों में फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट बनाकर तबादला लेने का मामले सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है, ऐसे में अब शिक्षा निदेशालय में विशेष मेडिकल बोर्ड का गठन किया जा रहा है, जिनकी सहमति के आधार पर ही अब बीमार शिक्षकों के तबादले हो सकेंगे, जिसकी प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है, इसके साथ ही गंभीर बीमारी से ग्रसित शिक्षकों व कर्मियों को अनिवार्य रूप से वीआरएस दिलाया जाएगा, राज्य सरकार शिक्षकों के सालाना ट्रांसफर के लिये तैयार हो गई है, इसके लिये विभागीय स्तर पर सभी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं, हाल ही में विभागीय उच्च स्तरीय बैठक में ट्रांसफर प्रक्रिया को निष्पक्ष व पारदर्शी बनाने के लिये तमाम अहम निर्णय लिये गये हैं, खासकर मेडिकल प्रमाण पत्रों की आड़ में स्थानांतरण (ट्रांसफर) का लाभ उठाने वाले शिक्षकों पर इस बार शिकंजा कसा जाएगा।

इसके लिए विद्यालयी शिक्षा महानिदेशक को निदेशालय स्तर पर जल्द ही विशेष मेडिकल बोर्ड गठित करने जा रहे है, विशेष मेडिकल बोर्ड दोबारा से शिक्षकों का मेडिकल परीक्षण करेगा। यही नहीं अगर किसी शिक्षक या कार्मिक में उनके माता-पिता, सास-ससुर, पति-पत्नी या बच्चों के स्वास्थ्य खराब होने का हवाला दिया है तो उनका भी स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाएगा, यही नहीं, राज्य स्तरीय चिकित्सा बोर्ड की ओर से जारी स्वास्थ्य प्रमाणपत्रों की प्रमाणिकता का भी सत्यापन किया जायेगा, यदि जांच में स्वास्थ्य प्रमाण पत्र फर्जी या तथ्यों के विपरीत पाया जाता है तो उस शिक्षक के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जायेगी। मंत्री ने कहा कि तमाम ऐसी शिकायतें प्राप्त हुई हैं कि बीते कुछ सालों में कुछ शिक्षकों ने फर्जी चिकित्सा प्रमाणपत्रों के आधार पर स्थानांतरण अधिनियम के प्रावधानों में छूट प्राप्त कर अपनी पसंद के विद्यालयों में तैनाती हासिल की, वही, शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने कहा कि कोर्ट में कर्मचारियों से संबंधित मामला विचाराधीन होने के चलते पिछले दो साल से शिक्षकों के तबादले नहीं हो पाए, जिसके चलते कोर्ट से अपील की गई है कि जिसके बाद कोर्ट ने छूट दे दी है कि जो अनुरोध वाले ट्रांसफर है, वो किए जा सकते हैं, ऐसे में कोई बीमार है या किसी का फैमली इश्यू है तो उनके तबादले किए जा सकते है।

उम्मीद है कि अब शिक्षकों के स्थानांतरण की प्रक्रिया जल्द ही शुरू हो जाएगी, इसके लिए कार्मिक विभाग से भी अनुमति ली गई है जिस पर शिक्षकों के तबादले में छूट मिल गई है, इसके साथ ही शिक्षकों के तबादले भी ऑनलाइन किए जाने की तरफ विभाग आगे बढ़ रहा है,शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने कहा कि शिक्षा विभाग के तमाम ऐसे शिक्षक है, जिनकी स्थितियां पढ़ाने लायक नहीं है, क्योंकि उनको स्वास्थ्य संबंधित काफी दिक्कत है, स्वास्थ्य विभाग ने भी उनको मना कर दिया है कि वो स्कूल नहीं जा सकते है, ऐसे शिक्षकों और कार्मिकों के लिए भी वीआरएस का नया रास्ता खोला गया है, यही नहीं जब भी तबादले होते है तो बड़ी संख्या में कार्मिक मेडिकल सर्टिफिकेट बना लेते है, जिसको देखते हुए शिक्षा निदेशालय स्तर पर विशेष मेडिकल बोर्ड बैठाने जा रहे है, जहां पर सभी के मेडिकल सर्टिफिकेट की जांच की जाएगी, ऐसे में जिनका मेडिकल सर्टिफिकेट सही पाया जाएगा उन्हीं को ट्रांसफर एक्ट में शामिल किया जाएगा।

सुरेन्द्र सिंह रावत

सुरेन्द्र सिंह रावत

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Professional journalist writing regular analytical and research reports on key political, cultural, and technological fields globally.

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