उत्तराखंड

बद्रीनाथ के नरेंद्रनगर राजदरबार में महारानी और सुहागिनों ने पिरोया तिल का तेल, 22 अप्रैल को खुलेंगे धाम

सुरेन्द्र सिंह रावत By सुरेन्द्र सिंह रावत Apr 07, 2026 10:27 1 views 0 Comments
बद्रीनाथ के नरेंद्रनगर राजदरबार में महारानी और सुहागिनों ने पिरोया तिल का तेल, 22 अप्रैल को खुलेंगे धाम

टिहरी राज दरबार में भगवान बदरी विशाल के अभिषेक में प्रयोग होने वाले तिलों के तेल को पिरोने की परंपरा पूरी तरह से धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधा...

टिहरी राज दरबार में भगवान बदरी विशाल के अभिषेक में प्रयोग होने वाले तिलों के तेल को पिरोने की परंपरा पूरी तरह से धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। इसकी तिथि वसंत पंचमी के दिन तय की जाती है। डिम्मर गांव से पुजारी गाडू घड़ा लेकर नरेंद्रनगर स्थित राज दरबार पहुंचते हैं। तय मुहूर्त के अनुसार चयनित की गई सुहागिन महिलाएं भुने हुए तिलों को पिरोना शुरू करती हैं। यह पूरी प्रक्रिया तब तक चलती है, जब तक की घड़ा पूरा नहीं भर जाता। भगवान बदरी विशाल के नित्य प्रति महाभिषेक पूजा में प्रयुक्त होने वाले तिलों का तेल नरेंद्रनगर राजदरबार में पिरोया जा रहा है। टिहरी सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह और अन्य सुहागिन महिलाओं द्वारा यह तीलों का तेल पिरोया जा रहा है। और फिर भगवान बदरी विशाल के तेल कलश गाडू घड़ा में इस तेल को भरा जाएगा।

शोभा यात्रा के तहत नरेंद्रनगर राजदरबार से आज शाम को ऋषिकेश प्रस्थान करेगी।दो चरणों में शोभायात्रा तेल कलश बदरीनाथ धाम के पुजारी समुदाय डिमरियों के मूल ग्राम डिम्मर होते हुए बदरीनाथ यात्रा मार्ग से बदरीनाथ धाम 22 अप्रैल को पहुंच जाएगा। 23 अप्रैल को भगवान बद्रीनाथ धाम  के कपाट खुलने के साथ ही गर्भ गृह  में तेल कलश स्थापित कर दिया जाएगा। इसी तेल से भगवान बद्री विशाल का अभिषेक होगा। तीलों का तेल पिरोये जाने की इस पूरी प्रक्रिया में 8 से 10 घंटे का समय लग जाता है। खास बात यह है कि जिन महिलाओं को इस कार्य के लिए चिह्नित किया जाता है, उन्हें परंपराओं का ज्ञान होना आवश्यक है। इसके अलावा अनुभव भी होना जरूरी है। हर कोई सुहागिन महिला इस प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सकती है। वहीं जिनके परिवार में किसी की मृत्यु हुई हो उन महिलाओं को भी इस धार्मिक आयोजन में शामिल नहीं किया जाता है।

महारानी माला राज्यलक्ष्मी शाह बताती हैं कि वे पूर्वजों की सदियों से स्थापित परंपरा का निर्वहन कर रही हैं। उन्होंने अपनी आने वाली पीढ़ी को भी इस धार्मिक कार्य करने की सीख दी है। वह बताती हैं कि टिहरी राजदरबार से जुड़ीं भविष्य की पीढ़ी भी बदरीनाथ मंदिर से जुड़ीं परंपराओं को निभाने के लिए तैयार है। खास तौर से इस आयोजन के लिए आई माला राज्यलक्ष्मी शाह की नातिनी का कहना है कि स्कूली शिक्षा और परीक्षा के कारण वो नहीं आ पाती थी, लेकिन अब यहां आकर इसमें शामिल होती रहेंगी।

सुरेन्द्र सिंह रावत

सुरेन्द्र सिंह रावत

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Professional journalist writing regular analytical and research reports on key political, cultural, and technological fields globally.

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