उत्तराखंड

पांच साल से लापता एक युवक बदरीनाथ में मिला,परिजन मृत मान चुके थे, पुलिस की मदद से बेटे का भावुक मिलन

सुरेन्द्र सिंह रावत By सुरेन्द्र सिंह रावत Apr 30, 2026 00:41 1 views 0 Comments
पांच साल से लापता एक युवक बदरीनाथ में मिला,परिजन मृत मान चुके थे, पुलिस की मदद से बेटे का भावुक मिलन

पांच साल से घर से लापता युवक का न कोई सुराग न कोई पता होने के बाद स्वजन जिसे अब मृत समझ बैठे थे भूबैंकुंठ बदरी नारायण की भूमि में पांच साल बाद बेटे व...

पांच साल से घर से लापता युवक का न कोई सुराग न कोई पता होने के बाद स्वजन जिसे अब मृत समझ बैठे थे भूबैंकुंठ बदरी नारायण की भूमि में पांच साल बाद बेटे व मां पापा के मिलन देख सबकी आंखे छलछला उठी। बेटे को वापस पाकर स्व्जन फूटफूट कर रो पड़े। आर्थिक स्थिति ठीक न होने के बाद भी पांच हजार रुपए उधार मांगकर वे अपने बेटो को लेने चमोली पहुंचे हैं। कहते हैं बद्री विशाल के दर से कोई खाली हाथ नहीं लौटता, लेकिन इस बार भगवान ने किसी की मुराद पूरी करने के लिए ''खाकी'' को जरिया बनाया। माणा की बर्फीली पहाड़ियों की ओर बढ़ते एक गुमनाम कदम, जो पांच साल पहले राजस्थान की गलियों से भटक गए थे। बताया कि बदरीनाथ पुलिस को सूचना मिली कि एक विक्षिप्त सा दिखने वाला व्यक्ति माणा गांव से ऊपर खतरनाक रास्तों की ओर बढ़ रहा है।

अनहोनी की आशंका को देखते हुए पुलिस उसे सुरक्षित थाने ले आई। वह व्यक्ति अपनी पहचान बताने की स्थिति में नहीं था, लेकिन पुलिस और अभिसूचना इकाई की टीम ने जब धैर्य और मनोवैज्ञानिक तरीके से बातचीत की, तो ''राजस्थान'' शब्द उभर कर आया। कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए टीम ने राजस्थान में उसके स्वजनों का सुराग ढूंढ निकाला। पांच साल से बेटे की राह देख रहे परिजनों को जब फोन पहुंचा, तो उन्हें यकीन ही नहीं हुआ कि जिसे वे मृत मान चुके थे, वह बदरीनाथ में सुरक्षित है। स्वजनों के आने तक बदरीनाथ पुलिस ने मानवता की एक अनूठी मिसाल पेश की। पुलिसकर्मियों ने स्वयं आगे बढ़कर उस व्यक्ति को नहलाया-धुलाया, उसके बाल और दाढ़ी कटवाकर हुलिया संवारा। जवानों ने अपने निजी खर्च से उसके लिए नए कपड़े खरीदे और तत्काल स्वास्थ्य परीक्षण भी करवाया। घर भेजने से पहले पुलिस उसे श्रद्धापूर्वक भगवान बद्री विशाल के द्वार ले गई और विशेष दर्शन कराए, ताकि उसकी नई जिंदगी की शुरुआत मंगलमय हो।

जब राजस्थान से स्वजन बदरीनाथ पहुंचे, तो दृश्य अत्यंत भावुक कर देने वाला था। बेटे को जीवित देख माता-पिता की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। बातचीत के दौरान परिजनों ने अपनी व्यथा सुनाई कि वे बेहद गरीब हैं और यहां आने के लिए भी 5,000 उधार मांग कर लाए थे, जो अब समाप्त हो चुके हैं। उनके पास वापस लौटने तक के पैसे नहीं बचे थे। थानाध्यक्ष बदरीनाथ नवनीत भंडारी तत्काल आपसी सहयोग और ट्रस्ट की सहायता से धनराशि एकत्रित की और स्वजनों को सौंपकर उन्हें राजस्थान भेजा।

सुरेन्द्र सिंह रावत

सुरेन्द्र सिंह रावत

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Professional journalist writing regular analytical and research reports on key political, cultural, and technological fields globally.

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