देहरादून में इनकम टैक्स के छापे में शामिल रहे 100 अफसर, खंगाली आलीशान होटल की कुंडली
By सुरेन्द्र सिंह रावत
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Nov 13, 2025 02:12
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देहरादून में बिल्डरों और शराब कारोबारियों पर की गई छापेमारी को इन्वेस्टिगेशन विंग ने बेहद गोपनीय रखा। जांच में सभी कार्मिक इन्वेस्टिगेशन विंग से लिए...
देहरादून में बिल्डरों और शराब कारोबारियों पर की गई छापेमारी को इन्वेस्टिगेशन विंग ने बेहद गोपनीय रखा। जांच में सभी कार्मिक इन्वेस्टिगेशन विंग से लिए गए हैं। असेसमेंट के किसी भी कार्मिक को छापे में शामिल नहीं किया गया।
आयकर विभाग की इन्वेस्टिगेशन विंग जब भी बड़े स्तर पर छापेमारी करती है तो उसमें इन्वेस्टिगेशन विंग के साथ ही असेसमेंट से जुड़े आयकर कार्मिकों को भी शामिल किया जाता है। ताकि जांच में किसी भी तरह की कमी न रहे। उत्तराखंड की इन्वेस्टिगेशन विंग अन्य राज्यों की तुलना से छोटी है। इसके बाद भी सिर्फ इन्वेस्टिगेशन विंग को जगह दी गई और कार्मिकों की कमी को पूरा करने के लिए उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों में तैनात इन्वेस्टिगेशन विंग के कार्मिकों को शामिल किया गया। इस तरह छापें के लिए 100 अधिकारियों और कर्मचारियों की समुचित टीम तैयार कर ली गई। बताया जा रहा है कि रणनीति के मुताबिक आयकर विभाग को इस छापे में पूरी सफलता मिलती दिख रही है।
आयकर सूत्रों के अनुसार बिल्डर इंदर खत्री का डोईवाला के पास लाल तप्पड़ क्षेत्र में आलीशान होटल का निर्माण चल रहा है। निर्माणाधीन होटल के पास भी संबंधित बिल्डर की दर्जनों बीघा जमीन है। आयकर विभाग ने जांच के दौरान होटल और उससे जुड़े निर्माण कार्यों और धन की उपलब्धता का एक एक प्रमाण खंगाला गया। आयकर विभाग के सूत्रों के अनुसार कुछ ऐसे ट्रांजेक्शन मिले हैं, जिन्हें बिल्डरों और शराब कारोबारियों ने अपने रिटर्न में नहीं दर्शाया। लंबे समय तक विभाग ने छापे के दायरे में लिए गए कारोबारियों के रिटर्न की जांच की। जब बार बार इसी तरह की पुनरावृत्ति की जाती रही तो अधिकारियों ने जाल बुनना शुरू कर दिया।
बताया जा रहा है कि कुछ ट्रांजेक्शन शराब और रियल एस्टेट कारोबारियों ने आपस में भी किए हैं। जब विभाग ने कड़ी दर कड़ी जोड़ी तो सभी पकड़ में आ गए। इसके अलावा बिल्डरों के ठिकानों से जो दस्तावेज जब्त किए गए हैं, उनमें कई सफेदपोशों के नाम भी हैं। बताया जा रहा है कि कुछ राजनेताओं और कुछ अधिकारियों की हिस्सेदारी भी रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में हो सकती है। लिहाजा, आयकर विभाग के अधिकारी बिल्डरों से गहन पूछताछ की कर रहे हैं। हालांकि, आयकर विभाग के अधिकारियों ने अभी नामों को लेकर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है।
उत्तराखंड में लंबे समय से रियल स्टेट और शराब का कारोबार काला धन खपाने का सुरक्षित ठिकाना माना जाता रहा है। दरअसल, इन दोनों सेक्टर में बड़े स्तर पर कारोबार कैश में किया जाता है। खरीद और बिक्री कैश में होने के चलते अतिरिक्त आय के बड़े हिस्से को रिटर्न में शामिल नहीं किया जाता है। लिहाजा, आयकर विभाग इन दोनों सेक्टर पर सघन निगरानी करती है। इन दोनों सेक्टर में खरीद और बिक्री की चेन बेहद लंबी होती है और किसी न किसी कड़ी से सुराग हाथ लग ही जाता है। जिसके आधार पर आयकर विभाग के हाथ देर सबेर मुख्य कड़ी तक भी पहुंच जाते हैं। इस मामले में भी इसी तरह की बात सामने आ रही है।
सुरेन्द्र सिंह रावत
Verified Reporter
Professional journalist writing regular analytical and research reports on key political, cultural, and technological fields globally.
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