सितारगंज में किसानों की फसल ख़रीद   मंडी के नालें में बही किसानों के खून-पसीनें से सींची फसल

सितारगंज में नई मंडी समिति के फड पर सुखाने को रखी धान की फसल बरसात के पानी के साथ मंडी के नालियों में बह गई। इस घटना ने ना सिर्फ किसान को चिंतित कर दिया बल्कि उसके माथें पर चिंता की लकीर को साफ देखा जा सकता है। दीपावली पर घर रोशन करने की चाहत के साथ किसान फसल लेकर मंडी पहुंचे थे। लेकिन मंगलवार को आई तेज बारिश ने उनकी फसल को भीगाकर उनके सभी अरमानों पर पानी फेर दिया। हालांकि, किसानों ने अपनी फसल को बचाने के लिए त्रिपाल का सहारा लिया था। लेकिन वह ना काफी गुजरा।

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दड़हाफार्म निवासी किसान गुरसेवक सिंह ने बताया कि वह करीब 10 दिन पहले अपनी फसल को लेकर मंडी आया था। यहां बारदाना उपलब्ध न होने के कारण उसकी फसल की तौल नहीं हुई। वहीं, अब उसकी 9 एकड़ में लगाई गई फसल बरसात में भींग कर बर्बाद होने की कगार पर है। गांव नकहा निवासी किसान शमशेर सिंह ने बताया कि मंडी में उचित व्यवस्था न होने के कारण बरसात में उसका करीब 400 क्विंटल धान भीग गया।

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गांव करघटिया निवासी किसान रणधीर बल ने बताया कि उनका भी 250 क्विंटल धान मंडी के फड़ पर पड़ा था। जो बरसात में भींगकर नष्ट होने की कगार पर है। वहीं, आरएफसी लता मिश्रा ने नई मंडी परिसर में स्थित दो क्रय-विक्रय केंद्र को तत्काल खोलने के निर्देश दिए। उन्होंने एसएमओ विनय चौधरी से कहा कि वह किसानों की फसल ख़रीद के लिए लेकर टोकन सिस्टम को लागू करें। साथ ही, उन्होंने किसानों से उनकी फसल को सुखा कर लाने के लिए कहा।

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