BIG BREAKING: डॉक्टरों को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने लिया बड़ा फैसला

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देश भर में डॉक्टरों की हड़ताल के बीच स्वास्थ्य मंत्रालय ने बड़ा फैसला किया है। केंद्र सरकार ने सभी मेडिकल हॉस्पिटल्स में 25% सुरक्षा बढ़ाने का आदेश दिया है। वहीं, मंत्रालय ने हेल्थकेयर वर्कर्स की सुरक्षा के लिए एक कमेटी भी बनाने का आदेश दिया है। DGHS की अध्यक्षता में जो कमेटी बनाई जाएगी, वह डॉक्टरों और हेल्थकेयर वर्कर्स की समस्याओं पर सुझाव लेंगी। डॉक्टरों की बेसिक समस्याएं जैसे रेस्ट रुम, CCTV सुविधाएं इन सबको दुरुस्त किया जाएगा। जरूरत के आधार पर मार्शल भी बढ़ाए जाएंगे।

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अस्पताल में हिंसा मामले को लेकर 6 घंटे के भीतर FIR दर्ज कराने का आदेश दिया गया है। इस कमेटी में राज्य सरकार समेत सभी अहम स्टेकहोल्डर्स के प्रतिनिधि होंगे। स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी से आज कई रेजिडेंट डॉक्टरों के प्रतिनिधियों की मुलाकात हुई। 26 राज्यों में पहले ही स्वास्थ्य सेवाकर्मियों की सुरक्षा के लिए कानून है। जिसमें 3 साल से 10 तक की सजा का प्रावधान है।

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सरकार ने डाक्टरों को समझाया कि ऑर्डिनेंस से कोई फायदा नहीं होगा। रेजिडेंट डॉक्टरों की मांग उचित नहीं है। डॉक्टर जो भी मांग कर रहे हैं, वह राज्यों के कानून में कवर नहीं होता। पश्चिम बंगाल का मामला निंदनीय है और ये रेप मर्डर के कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। अगर डॉक्टर ऐसे ही अपनी मांग पर अड़े रहे तो कानून और कोर्ट के आदेश के आधार पर डॉक्टर के खिलाफ एक्शन हो सकता है।

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मिनिस्ट्री ने प्रदर्शन पर बैठे डॉक्टर्स को काम पर लौटने को कहा है। मंत्रालय का कहना है कि इस समय डेंगू और मलेरिया के मामले बढ़ रहे हैं तो इस समय डॉक्टर्स की बहुत जरूरत है। मंत्रालय ने डॉक्‍टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी उपाय सुझाने के लिए एक समिति गठित करने का आश्‍वासन दिया है। 26 राज्य स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा के लिए कानून पारित कर चुके हैं। दिल्‍ली मेडिकल एसोसिएशन के वरिष्‍ठ उपाध्‍यक्ष डॉ. सुनील सिंघल ने कहा कि हम जनहित में अब भी काम कर रहे हैं। हम इमरजेंसी ड्यूटी कर रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि हमें स्‍टेट लॉ नहीं बल्कि सीपीए चाहिए। साथ ही उन्‍होंने कहा कि हमें काम करने के लिए सुरक्षित वातावरण चाहिए। उन्‍होंने सरकार के कमेटी बनाने पर कहा कि कमेटी बनाने से क्‍या होगा, यह पहले भी हो चुका है।

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