अल्मोड़ा

उत्तराखंड अल्मोड़ा के रवि टम्टा का कमाल, बनाई ‘उड़ने वाली कार’, 1.5 घंटे का सफर 12 मिनट में

सुरेन्द्र सिंह रावत By सुरेन्द्र सिंह रावत Aug 07, 2026 15:48 82 views 0 Comments

उत्तराखंड के रवि टम्टा की उपलब्धि भी कुछ ऐसी ही है। उन्होंने ‘उड़ने वाली कार’ यानी पर्सनल फ्लाइड व्हीकल का आविष्कार किया है। रवि टम्टा का कहना है कि वह पिछले 10 साल से इस पर काम कर रहे थे। उन्होंने परीक्षण के तौर अल्मोड़ा के मैदान पर इसे कुछ देर उड़ाया। उनका दावा है कि यह भारत में इस तरह का पहला आविष्कार है। रवि टम्टा अल्मोड़ा जनपद के रहने वाले हैं। वह प्रदेश के युवा इनोवेटर हैं। उन्होंने और उनकी टीम ने HAPIDA SKYNeX के प्रोटोटाइप का सफल प्रारंभिक परीक्षण कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। रवि ने साबित कर दिया कि सपनों की उड़ान संसाधनों से नहीं, संकल्प से तय होती है। बेहद कम संसाधनों में रवि और उनकी टीम ने पर्सनल स्काई मोबिलिटी की दिशा में बेहतरीन प्रयास किया है। यदि यह तकनीक आगे सभी परीक्षणों में सफल होती है तो यह देश में परिवहन की दिशा में नई क्रांति ला सकती है। रवि खुद इस उपलब्धि को लेकर काफी खुश और उत्साहित हैं।

रवि टम्टा ने कहा कि उन्हें इस उपलब्धि की बेहद खुशी है। पिछले कई समय से इस पर काम कर रहा था कि कैसे इसे बना सकते हैं। काफी समय से सपना था फ्लाइंग कार का। दस साल तक लगातार संघर्ष के बाद मैं इसे सफल कर पाया हूं। अपनी पहली उड़ान के बारे में बोलते हुए रवि ने कहा कि अभी इसमें समय लगेगा, हालांकि अल्मोड़ा के मैदान पर उन्होंने परीक्षण के तौर पर उड़ाया। मैदान से उनके घर की दूरी 40 किलोमीटर है। अगर मैं रोड से जाता तो तकरीबन 1.5 घंटे लगते, लेकिन मैं इससे मैदान से अपने घर सिर्फ 12 मिनट में ही पहुंच सकता हूं। रवि ने कहा कि अभी मुझे परमिशन लेनी है। इसलिए ज्यादा उड़ान नहीं भर पाया हूं। हवा में सफर करना, जमीन के मुकाबले चुनौतीपूर्ण होता है। काफी समय मैंने इस पर मेहनत की। उन्होंने दावा किया है कि भारत में पहली पर्सनल फ्लाइंग व्हीकल है। 

रवि टम्टा ने कहा कि मेरे इस आविष्कार के पीछे के विजन की बात करें तो मैं स्पष्ट कर दूं कि अगर कोई मेडिकल इमरजेंसी हो या ट्रैफिक जाम,उसे देखते हुए यह आविष्कार काफी अहम है। आठ से 10 साल बाद आप देखेंगे कि यह हर घर में नॉर्मल बात होगी। हम इसे हर घर तक पहुंचाने की कोशिश करेंगे। इस छोटे फ्लाइंग व्हीकल को कम लागत और बेहतरीन तकनीक के साथ पहाड़ों की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जा रहा है। रवि ने इसे अपने सीमित संसाधनों और कड़ी मेहनत के दम पर तैयार किया है, जो उनकी बेजोड़ इंजीनियरिंग सोच को दर्शाता है।

सुरेन्द्र सिंह रावत

सुरेन्द्र सिंह रावत

Verified Reporter

Professional journalist writing regular analytical and research reports on key political, cultural, and technological fields globally.

Enjoyed this article?

Share it with your friends and colleagues.

Comments (0)

No comments yet. Be the first to share your thoughts!

Leave a Comment