टनकपुर-जौलजीबी मार्ग पर बनेगा कुमाऊं का सबसे लंबा पुल, दिल्ली से चाइना बॉर्डर पहुंचना होगा आसान
By सुरेन्द्र सिंह रावत
•
Oct 18, 2026 10:10
•
8 views
•
0 Comments
पिथौरागढ़ के तवाघाट से चीन सीमा लिपुलेख तक की दूरी टनकपुर-जौलजीबी मार्ग बनते ही 70 से 75 किमी हो जाएगी। सुबह देश की राजधानी दिल्ली से चलकर सायं गुंजी पहुंचा जा सकेगा। इस मार्ग पर पिथौरागढ़ ओर चंपावत जिले के बीच बहने वाली सरयू नदी पर कुमाऊं का सबसे लंबा 690 मीटर का पुल बनेगा। नेपाल सीमा पर काली नदी किनारे के अब तक अनछुए स्थल नए पर्यटन डेस्टिेनेशन बनेंगे और सीमा छोर पर विकास की एक नई तस्वीर सामने आएगी। अब तक की प्रगति के अनुसार, टनकपुर से रूपाली गाड़ तक करीब 55 किलोमीटर लंबी टू-लेन सड़क का निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है। इसके साथ ही सरयू नदी पर लगभग 690 मीटर लंबे पुल के निर्माण की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है। रूपाली गाड़ से पंचेश्वर और आगे जौलजीबी तक के शेष हिस्से के लिए डीपीआर और सर्वे का कार्य तेजी से चल रहा है।
इस मार्ग के बनने से न केवल सामरिक गतिविधियों को मजबूती मिलेगी, बल्कि आदि कैलास, ओम पर्वत और दारमा-व्यास, जोहार की घाटियों में आने वाले पर्यटकों को भी सुगम यातायात की सुविधा मिलेगी। क्षेत्रवासियों ने सरकार से बचे हुए हिस्सों का कार्य जल्द पूरा कराने की मांग की है। टनकपुर - जौलजीबी निर्माणाधीन मार्ग पर अब रुपाली गाड़ से पंचेश्वर, पंचेश्वर में सरयू नदी पर पुल निर्माण , पंचेश्व से हल्दू होते हुए बलतड़ी तक मोटर मार्ग निर्माण होना है। इस मार्ग निर्माण की सबसे अच्छी बात यह है कि वन भूमि का झंझट कम है। मार्ग पर केवल छह किमी क्षेत्र पंचेश्वर से पिथौरागढ़ के हल्दू तक ही चटटानी क्षेत्र है। पंचेश्वर से बलतड़ी दूरी 32 किमी है।इस क्षेत्र में ही नए सिरे से सड़क कटनी है। झूलाघाट से जौलजीबी तक सिंगल लेन सड़क कटी है जिले डबल लेन कटना । निर्माणाधीन मार्ग पर रुपाली गाड़ से जौलजीबी तक मात्र 60 किमी सड़क ही नए सिरे से सड़क कटनी है।
मुख्य अभियंता लोनिवि अल्मोड़ा द्वारा बलतड़ी से जौलजीबी तक टू लेन मोटर मार्ग परियोजना के तहत अंतिम चरण कार्य के लिए 750.62 करोड़ का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है, गृह मंत्रालय के बार्डर मैनेजमेंट से वित्तीय स्वीकृति मिलनी है। पिथौरागढ का बलतड़ी 104.646 किमी है , और जौलजीबी 138.123 किमी है। 33.488 किमी लंबी टू लेन निर्माण सेतुओं सहित होना है। यह परियोजना प्रधानमंत्री और भारत सरकार की पाथमिकता में शामिल है।जिस तेजी के साथ कार्य हो रहा है उसे देखकर कार्य के जल्दी पूरा होने के आसार हैं। बजट की कोई समस्या नहीं है । इस सड़क के बनने से आदि कैलास, ओम पर्वत, पंचाचूली ग्लेशियर, मिलम ग्लेशियर तक पहुंचना बेहद आसान हो जाएगा। नेपाल सीमा पर यह सामरिक दृष्टि से अति महत्व की सड़क होगी।
सुरेन्द्र सिंह रावत
Verified Reporter
Professional journalist writing regular analytical and research reports on key political, cultural, and technological fields globally.
Comments (0)
No comments yet. Be the first to share your thoughts!