हरियाणा के युवक ने उत्तराखंड में फर्जी अंकपत्र से पाई डाकपाल की नौकरी, कोर्ट ने सुनाया कठोर कारावास
By सुरेन्द्र सिंह रावत
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Jul 30, 2026 19:45
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बागेश्वर के न्यायिक मजिस्ट्रेट सिविल जज जूनियर डिवीजन गरुड़ शिवानी नाहर के न्यायालय ने फर्जी हाईस्कूल अंकपत्र के आधार पर भारतीय डाक विभाग में शाखा डाकपाल की नौकरी हासिल करने वाले हरियाणा निवासी ओम प्रकाश को दोषी ठहराया है। न्यायालय ने उसे तीन माह के कठोर कारावास और 14 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। सभी सजाएं साथ-साथ चलने के कारण आरोपित को अधिकतम तीन माह का कठोर कारावास भुगतना होगा। अभियोजन के अनुसार, ओम प्रकाश, जो ग्राम जनोला, तहसील पटौदी, जिला गुरुग्राम, हरियाणा का निवासी है, ने वर्ष 2022 में नौघर स्टेट, कौसानी शाखा डाकघर में शाखा डाकपाल के पद पर नियुक्ति के लिए जम्मू-कश्मीर बोर्ड का वर्ष 2016 का हाईस्कूल का अंकपत्र प्रस्तुत किया था।
जब दस्तावेजों का सत्यापन किया गया, तब जम्मू-कश्मीर बोर्ड आफ स्कूल एजुकेशन ने पुष्टि की कि प्रस्तुत अंकपत्र फर्जी और कूटरचित है।इस जानकारी के बाद, डाक विभाग ने ओम प्रकाश की सेवा समाप्त कर थाना कौसानी में उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468 और 471 के तहत आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने सात गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए। न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ओम प्रकाश को सभी आरोपों में दोषी पाया।
न्यायालय ने ओम प्रकाश को धारा 420 के तहत एक माह का कठोर कारावास और दो हजार रुपये, धारा 467 के तहत तीन माह का कठोर कारावास और आठ हजार रुपये, धारा 468 के तहत दो माह का कठोर कारावास और तीन हजार रुपये तथा धारा 471 के तहत एक माह का कठोर कारावास और एक हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। सभी सजाएं एक साथ चलने के कारण प्रभावी सजा तीन माह का कठोर कारावास रहेगी, जबकि कुल अर्थदंड 14 हजार रुपये होगा। न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि आरोपित द्वारा न्यायिक हिरासत में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा। इसके साथ ही, अपराध की गंभीरता को देखते हुए उसे अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 का लाभ देने से भी इनकार कर दिया गया।
सुरेन्द्र सिंह रावत
Verified Reporter
Professional journalist writing regular analytical and research reports on key political, cultural, and technological fields globally.
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