देहरादून

उत्तराखंड में गुटखा, पान मसाला बैन, धामी सरकार ने जनस्वास्थ्य के लिए दांव पर लगाए 40 करोड़

सुरेन्द्र सिंह रावत By सुरेन्द्र सिंह रावत Oct 14, 2026 09:05 • 182 views • 0 Comments
उत्तराखंड में गुटखा, पान मसाला बैन, धामी सरकार ने जनस्वास्थ्य के लिए दांव पर लगाए 40 करोड़

उत्तराखंड में तंबाकू और निकोटिन युक्त गुटखा, पान मसाला समेत अन्य प्रतिबंधित खाद्य उत्पादों पर एक साल की रोक लगाकर उत्तराखंड सरकार ने जनस्वास्थ्य को राजस्व से ऊपर रखा है। इन उत्पादों के कारोबार से सरकार को सालाना करीब 40 करोड़ रुपये का जीएसटी मिलता है। प्रतिबंध के चलते इस कारोबार पर बड़ा असर पड़ने की आशंका है। हालांकि, सरकार ने राजस्व के नुकसान की परवाह किए बिना जनस्वास्थ्य को प्राथमिकता दी है। तंबाकू उत्पादों पर जीएसटी की अधिकतम दर 28 प्रतिशत है। इसके अतिरिक्त संबंधित उत्पादों पर सेस भी लगाया जाता है, जिससे कर का कुल बोझ कुछ श्रेणियों में करीब 40 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। ऐसे में प्रतिबंध से केवल दुकानदारों की बिक्री ही प्रभावित नहीं होगी, बल्कि थोक कारोबारियों, वितरकों और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े अन्य कारोबारियों पर भी असर पड़ सकता है।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इन उत्पादों से सालाना करीब 40 करोड़ रुपये का जीएसटी प्राप्त होता है। इसमें लगभग 50 प्रतिशत यानी 20 करोड़ रुपये राज्य और शेष 20 करोड़ रुपये केंद्र सरकार के हिस्से में जाते हैं। हालांकि, वास्तविक राजस्व हानि इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रतिबंध के दायरे में आने वाले उत्पादों की बिक्री कितनी थी, आदेश का अनुपालन किस स्तर तक होता है और संबंधित कारोबार में कितनी गतिविधियां प्रभावित होती हैं। यदि 40 करोड़ रुपये के कर संग्रह को 40 प्रतिशत की प्रभावी कर दर के आधार पर देखा जाए, तो इससे लगभग 100 करोड़ रुपये के करयोग्य कारोबार का संकेत मिलता है। प्रतिबंध के चलते संबंधित उत्पादों के निर्माता, थोक विक्रेता, वितरक और खुदरा दुकानदार प्रभावित हो सकते हैं। जिन कारोबारियों ने इन उत्पादों का स्टॉक रखा है, उनके सामने भी माल के निस्तारण और नियमों के अनुपालन का सवाल खड़ा हो सकता है। हालांकि, स्टॉक को लेकर क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी, यह संबंधित विभाग के निर्देशों और लागू कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करेगा।

सुरेन्द्र सिंह रावत

सुरेन्द्र सिंह रावत

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Professional journalist writing regular analytical and research reports on key political, cultural, and technological fields globally.

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