उत्तराखंड में तबादलों के लिए शिक्षिकाएं ले रहीं कागजी तलाक, मामलों के खुलासे पर बैठी जांच
By सुरेन्द्र सिंह रावत
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Sep 01, 2026 06:52
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शिक्षा विभाग में सुगम क्षेत्रों में तबादला पाने के लिए शिक्षिकाएं कागजी तलाक का सहारा ले रही हैं। यह मनचाही तैनाती पाने का तरीका है। हाल ही में हुए 1500 से अधिक शिक्षकों के तबादलों में भी ऐसे मामले सामने आए हैं। प्रदेश में शिक्षकों और कर्मचारियों के तबादलों के लिए एक्ट बना है। इसके बावजूद 18 से 20 साल से दुर्गम में तैनात कई शिक्षिकाएं पहाड़ से नहीं उतर पा रही थीं। इस साल विभाग ने अधिनियम की धारा 17 (1) (ख) की पांच श्रेणियों के तहत अनुरोध के आधार पर तबादले का निर्णय लिया। इनमें माता-पिता, सास-ससुर की बीमारी, तलाकशुदा, विधवा या विधुर होना भी तबादले के लिए आधार थे। विभागीय सूत्रों के अनुसार, कुछ शिक्षिकाओं ने मनचाही जगह पर तबादले के लिए पति से तलाक ले लिया। हद तो तब हो गई जब तलाक के बावजूद पति अपनी शिक्षिका पत्नी को स्कूल छोड़ने पहुंच रहे हैं, जो कागजी तलाक की पुष्टि करता है।
सूत्रों के मुताबिक लंबे समय तक कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में नौकरी करने के बावजूद शिक्षिकाओं को जब सुगम क्षेत्रों में तैनाती नहीं मिली। तो उन्होंने पति से कागजी तलाक का रास्ता अपनाया। जो दर्शाता है कि दुर्गम से निकलने के लिए वे हर संभव रास्ता अपनाने को तैयार हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मामले की तहकीकात की जा रही है। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। शिक्षा विभाग में कई ऐसे भी शिक्षक हैं, जिनकी पूरी सेवा सुगम क्षेत्र के विद्यालयों की हैं। इसमें वीआईपी परिवार के शिक्षकों के साथ ही अन्य शिक्षक भी शामिल हैं। जो पिछले 20 से 25 साल से देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल सहित अन्य जिलों के सुगम क्षेत्र के विद्यालयों में तैनात हैं। तबादलों के लिए सास ससुर की सेवा को तैयार शिक्षा विभाग ने इस बार बड़ी संख्या में माता-पिता और सास-ससुर की बीमारी के आधार पर शिक्षिकाओं के तबादले किए हैं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इन शिक्षिकाओं को अब इसके लिए शपथ पत्र भी देना होगा। प्रधानाचार्य को दिए शपथ पत्र में यह स्पष्ट करना होगा कि वे बीमार माता-पिता व सास-ससुर की सेवा करेंगी। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक ऐसा न करने पर उनका तबादला रद्द किया जाएगा।
सुरेन्द्र सिंह रावत
Verified Reporter
Professional journalist writing regular analytical and research reports on key political, cultural, and technological fields globally.
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