उत्तराखंड में अफसरों के तबादलों पर फिर सुगबुगाहट, चुनाव से पहले फील्ड पोस्टिंग में बदलाव संभव
By सुरेन्द्र सिंह रावत
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Oct 14, 2026 09:32
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उत्तराखंड में अधिकारियों के तबादलों को लेकर फिर सुगबुगाहट तेज हो गई है, इस बार शासन ने अपने होमवर्क के दौरान चुनाव से पहले फील्ड अधिकारियों पर फोकस रखा है, हालांकि, तबादला सूची में कुछ शासन स्तर के अधिकारियों को भी मौजूदा जिम्मेदारी से बदले जाने पर विचार चल रहा है। उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले प्रशासनिक मशीनरी में बदलाव की तैयारी तेज होने के संकेत हैं, धामी सरकार अधिकारियों की संभावित तबादला सूची को लेकर एक बार फिर होमवर्क में जुट गई है, इस बार शासन का खास फोकस फील्ड स्तर पर तैनात अधिकारियों पर रहने की चर्चा है। माना जा रहा है कि संभावित सूची में आईएएस (IAS) और पीसीएस (PCS) अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं, इसमें लंबे समय से एक ही पद या तैनाती पर काम कर रहे अधिकारियों के साथ ही चुनावी दृष्टि से जिलों में प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नए अधिकारियों को जिम्मेदारी देने पर भी विचार हो सकता है।
तबादलों की इस कवायद में दो प्रमुख पहलुओं पर ध्यान दिए जाने की संभावना है, पहला ऐसे अधिकारियों की तैनाती में बदलाव जिन्हें एक ही स्थान पर तीन साल से ज्यादा समय हो चुका है, दूसरा जिलों में प्रशासनिक तालमेल और कामकाज को बेहतर बनाने के लिए अधिकारियों की जिम्मेदारियों में फेरबदल किया जाएगा, इस संभावित तबादला सूची में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव जिलों में देखने को मिल सकते हैं, चर्चाएं हैं कि राज्य के करीब तीन से चार जिलों में जिलाधिकारियों को बदला जा सकता है, इसके अलावा अपर जिलाधिकारी (ADM) और उपजिलाधिकारी (SDM) स्तर पर भी फेरबदल की संभावना है, कुछ जिलों में मुख्य विकास अधिकारी (CDO) की जिम्मेदारी भी नए अधिकारियों को सौंपी जा सकती है, जिलों में होने वाले इन बदलावों को इसलिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि विधानसभा चुनाव से पहले फील्ड स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करने की जरूरत होगी, जिलों में तैनात अधिकारियों की भूमिका चुनावी तैयारियों, कानून-व्यवस्था और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण होती है, ऐसे में शासन स्तर पर तैनाती और जिम्मेदारियों की समीक्षा की जा रही है।
फील्ड अधिकारियों के साथ शासन स्तर पर तैनात कुछ अधिकारियों के विभागों में भी बदलाव संभव है, चर्चा है कि कुछ बड़े विभागों की जिम्मेदारियों में फेरबदल पर विचार किया जा रहा है, लेकिन व्यापक बदलाव के बजाय चुनिंदा विभागों तक ही यह कवायद सीमित रह सकती है, विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने, कामकाज के बंटवारे में सुधार और प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से भी कुछ अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदली जा सकती हैं, दरअसल, आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए अधिकारियों की तैनाती का मामला महत्वपूर्ण हो गया है, निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत चुनाव से जुड़े अधिकारियों के कार्यकाल और तैनाती की समीक्षा की जाती है, हालांकि, तीन साल की अवधि का नियम सभी अधिकारियों पर एकसमान लागू नहीं होता, बल्कि संबंधित पद, चुनावी जिम्मेदारी और आयोग के निर्देशों के आधार पर इसकी पात्रता तय होती है।
सुरेन्द्र सिंह रावत
Verified Reporter
Professional journalist writing regular analytical and research reports on key political, cultural, and technological fields globally.
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