नैनीताल के बाद अब कैंचीधाम भी रोपवे से जुड़ेगा, ज्योलीकोट बनेगा बड़ा जंक्शन
By सुरेन्द्र सिंह रावत
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Sep 17, 2026 17:59
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नैनीताल और कैंचीधाम जाने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए रोपवे परियोजना को लेकर बड़ी तैयारी शुरू हो गई है। काठगोदाम से हनुमानगढ़ी तक प्रस्तावित रोपवे को अब कैंचीधाम से जोड़ने की दिशा में काम आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके लिए बुधवार को काठगोदाम स्थित सर्किट हाउस में अधिकारियों की उच्चस्तरीय बैठक हुई। परियोजना को लेकर हुई बैठक की अध्यक्षता प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने की। बैठक में रोपवे के रूट, स्टेशन, पार्किंग, भूमि और तकनीकी पहलुओं पर चर्चा हुई। अधिकारियों ने इसके बाद रानीबाग क्षेत्र का निरीक्षण भी किया। प्रस्तावित काठगोदाम-नैनीताल रोपवे की लंबाई करीब 14.9 किलोमीटर बताई गई है। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 2,800 करोड़ रुपये है। इसमें काठगोदाम, रानीबाग, भुजियाघाट, ज्योलीकोट और हनुमानगढ़ी स्टेशन प्रस्तावित हैं। परियोजना में करीब 58 टावर बनाए जाने की योजना है।
अब इस नेटवर्क को कैंचीधाम से जोड़ने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक ज्योलीकोट को जंक्शन स्टेशन के तौर पर विकसित करने का प्रस्ताव है, जहां से कैंचीधाम की ओर रोपवे कनेक्शन दिया जा सकता है। प्रस्ताव के अनुसार रानीबाग से हनुमानगढ़ी तक एक तरफ का किराया 375 रुपये प्रति व्यक्ति रखा गया है। रोपवे की क्षमता एक दिशा में प्रति घंटे करीब 1,800 यात्रियों की बताई गई है। रानीबाग से हनुमानगढ़ी तक का सफर करीब 20 से 25 मिनट में पूरा होने का अनुमान है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये परियोजना से जुड़े प्रस्तावित आंकड़े हैं। अंतिम रूट, किराया और निर्माण से जुड़ी व्यवस्थाएं आगे की प्रक्रिया और तकनीकी अध्ययन के बाद तय होंगी। कैंचीधाम में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए रोपवे कनेक्टिविटी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले नौ महीनों में करीब 50 लाख श्रद्धालु कैंचीधाम पहुंच चुके हैं। बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने से पहाड़ी सड़कों पर यातायात का दबाव भी बढ़ रहा है। ऐसे में रोपवे को सड़क यातायात के लिए एक अतिरिक्त विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है।
यात्रियों की सुविधा के लिए काठगोदाम रेलवे स्टेशन से रोडवेज परिसर तक करीब 250 मीटर लंबा फुटओवर ब्रिज बनाने की योजना पर भी चर्चा हुई है। इसका उद्देश्य रेलवे से आने वाले यात्रियों को रोपवे स्टेशन तक आसान कनेक्टिविटी देना है। रोपवे शुरू होने के बाद बड़ी संख्या में पर्यटक और श्रद्धालु अपने वाहनों से स्टेशन तक पहुंच सकते हैं। इसे देखते हुए काठगोदाम, रानीबाग और ज्योलीकोट क्षेत्र में पार्किंग विकसित करने की योजना है। रानीबाग में बड़ी पार्किंग के लिए एचएमटी परिसर की भूमि के इस्तेमाल की संभावना भी देखी जा रही है। रोपवे परियोजना पहाड़ी और संवेदनशील क्षेत्र से होकर गुजरने वाली है। इसलिए निर्माण से पहले तकनीकी, भू-गर्भीय और पर्यावरण से जुड़े पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा। भूमि से जुड़े मामलों और वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पर भी अधिकारियों ने चर्चा की है। कुल मिलाकर काठगोदाम-नैनीताल रोपवे को कैंचीधाम से जोड़ने की योजना आगे बढ़ने पर कुमाऊं में पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए परिवहन का एक नया विकल्प तैयार हो सकता है। फिलहाल परियोजना को अंतिम रूप देने से पहले तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
सुरेन्द्र सिंह रावत
Verified Reporter
Professional journalist writing regular analytical and research reports on key political, cultural, and technological fields globally.
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