अल्मोड़ा से माँ नंदा लोक जात यात्रा में शामिल होने कुमाऊँ का शिष्टमंडल रवाना कुमाऊं और गढ़वाल संस्कृति का मिलन
By सुरेन्द्र सिंह रावत
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Sep 12, 2026 11:02
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अल्मोड़ा से माँ नंदा देवी की आस्था और उत्तराखंड की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक मानी जाने वाली माँ नंदा लोक जात यात्रा में शामिल होने के लिए अल्मोड़ा से कुमाऊँ का शिष्टमंडल रवाना हो गया है। माँ नंदा देवी मंदिर समिति के नेतृत्व में यह दल कुमाऊँ का ध्वज लेकर यात्रा में सहभागिता करेगा। इतिहास के अनुसार, लगभग 1730 ईस्वी में कुमाऊँ के चन्द राजवंश के कुंवर (कुमार) परिवार ने इस यात्रा के आयोजन की कुछ मुख्य जिम्मेदारियों को संभाला था। नन्दा देवी केवल गढ़वाल की ही नहीं बल्कि कुमाऊँ क्षेत्र की भी कुलदेवी (राजराजेश्वरी) मानी जाती हैं। चन्द राजाओं के समय ही कुमाऊँ (जैसे अल्मोड़ा और नैनीताल) में नन्दा देवी के विशाल मेलों और डोलियों की परंपरा शुरू हुई थी।
यात्रा के दौरान कुमाऊँ क्षेत्र की विभिन्न देवियां और डोलियां गढ़वाल की यात्रा में शामिल होती हैं। कुलसारी (Kulsari) नामक पड़ाव पर गढ़वाल और कुमाऊँ दोनों क्षेत्रों के देवी-देवताओं और श्रद्धालुओं का पावन मिलन होता है। चंद वंशज राजा करन चन्द्र राज सिंह उर्फ केसी सिंह बाबा और युवराज नरेंद्र चन्द्र राज सिंह के निर्देश पर रवाना हुए शिष्टमंडल ने मंदिर परिसर से प्रस्थान किया। यात्रा के दौरान कुमाऊँ का ध्वज गढ़वाल से आई लोक जात यात्रा के साथ रहेगा और 25 सितंबर को सिद्धपीठ देवराड़ा में समापन कार्यक्रम में विशेष पूजा-अर्चना के बाद माँ नंदा राजराजेश्वरी के गर्भगृह में विराजमान होंगी। मंदिर समिति के अध्यक्ष मनोज वर्मा ने कहा कि माँ नंदा संपूर्ण उत्तराखंड की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान हैं। इस यात्रा में कुमाऊँ की सहभागिता दोनों मंडलों की साझा आस्था, सांस्कृतिक विरासत और भाईचारे को और मजबूत करेगी।शिष्टमंडल में करीब 25 श्रद्धालु और पारंपरिक वाद्ययंत्र दल भी शामिल है।
सुरेन्द्र सिंह रावत
Verified Reporter
Professional journalist writing regular analytical and research reports on key political, cultural, and technological fields globally.
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