अल्मोड़ा में भारत रत्न गोविंद बल्लभ पंत की 139 वीं जयंती पर पर्यावरण संस्थान में विशेष व्याख्यान कार्यक्रम आयोजित किया गया
By सुरेन्द्र सिंह रावत
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Sep 10, 2026 21:15
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अल्मोड़ा में भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत की 139 वीं जयंती के अवसर पर पर्यावरण संस्थान में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान 32 वें पंडित गोविंद बल्लभ पंत स्मारक व्याख्यान का आयोजन भी किया गया। कार्यक्रम में पूर्वोत्तर पर्वतीय विश्वविद्यालय शिलांग के कुलपति एवं वनस्पति विज्ञान के प्रोफेसर प्रो. एस. के. बारीक ने “हिमालय में क्षेत्रीय पारिस्थितिक तंत्रों एवं संकटग्रस्त पादपों का पुनर्स्थापन: सिद्धांत से क्रियान्वयन तक” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने हिमालयी क्षेत्रों में जैव विविधता संरक्षण और पारिस्थितिक तंत्रों के पुनर्स्थापन की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भारत सरकार की संयुक्त सचिव नमिता प्रसाद रहीं। कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी चर्चा की है।
अल्मोड़ा में भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत की 139 वीं जयंती पर पर्यावरण संरक्षण को लेकर गंभीर मंथन हुआ। पर्यावरण संस्थान में आयोजित 32 वें पंडित गोविंद बल्लभ पंत स्मारक व्याख्यान में हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की बिगड़ती स्थिति और संकटग्रस्त वनस्पतियों के संरक्षण पर विशेषज्ञों ने चिंता जताई। सवाल यही है कि हिमालय को बचाने के लिए सिर्फ व्याख्यान होंगे या जमीन पर भी ठोस काम दिखाई देगा? पर्यावरण संस्थान में आयोजित विशेष कार्यक्रम में पूर्वोत्तर पर्वतीय विश्वविद्यालय, शिलांग के कुलपति एवं वनस्पति विज्ञान के प्रोफेसर एस.के. बारीक ने “हिमालय में क्षरित पारिस्थितिक तंत्रों एवं संकटग्रस्त पादपों का पुनर्स्थापन—सिद्धांत से क्रियान्वयन तक” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने हिमालय में लगातार बिगड़ रहे पारिस्थितिक संतुलन, जैव विविधता के संरक्षण और संकटग्रस्त वनस्पतियों के पुनर्स्थापन की जरूरत पर जोर दिया। वहीं कार्यक्रम की मुख्य अतिथि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की संयुक्त सचिव नमिता प्रसाद रहीं।
कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को लेकर कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। लेकिन हिमालयी राज्यों में बढ़ता पर्यावरणीय दबाव, जंगलों और जैव विविधता पर संकट और बदलता पारिस्थितिकी तंत्र अब सिर्फ चर्चा का विषय नहीं, बल्कि बड़ी चुनौती बन चुका है। गोविंद बल्लभ पंत जयंती पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश जरूर दिया गया, लेकिन असली चुनौती अब संदेश को जमीन पर उतारने की है। हिमालय को बचाने के लिए नीति, शोध और प्रशासनिक इच्छाशक्ति—तीनों का असर धरातल पर कितना दिखता है, यही सबसे बड़ा सवाल है।
सुरेन्द्र सिंह रावत
Verified Reporter
Professional journalist writing regular analytical and research reports on key political, cultural, and technological fields globally.
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