देहरादून में कोतवाली शहर क्षेत्र की संकरी, तंग गलियां जहां अमूमन शाम ढलते ही चहल-पहल शांत हो जाती है, गुरुवार की रात वहां खौफ का सन्नाटा पसरा हुआ था। हिंदू किशोरी से दुष्कर्म की खबर जैसे ही शहर में फैली, आक्रोशित हिंदू संगठनों का हुजूम इन संकरी गलियों में उमड़ पड़ा। इसके बाद जो मंजर दिखा, उसने आसपास रहने वाले दर्जनों परिवारों की सांसें अटका दीं। हिंदू संगठनों की भारी भीड़ जब नारेबाजी करते हुए आरोपित के घर की तरफ बढ़ी, तो इलाके में सांप्रदायिक तनाव चरम पर पहुंच गया। तंग गली में गूंजते नारों और हंगामे से आसपास रहने वाले स्थानीय परिवार बुरी तरह सहम गए। उपद्रव और किसी अनहोनी के डर से सहमे लोगों ने आनन-फानन में अपने घरों की लाइटें बंद कर दीं।
खिड़की और दरवाजे भीतर से बंद कर लोग अपने ही घरों में दुबकने को मजबूर हो गए। बच्चे और महिलाएं दहशत के साए में रहे। हंगामा सिर्फ नारेबाजी तक सीमित नहीं रहा। भीड़ में शामिल कुछ उत्तेजित तत्वों ने आरोपित की दुकान और मकान में जमकर तोड़फोड़ की। देखते ही देखते हालात और बेकाबू हो गए जब कुछ लोगों ने आरोपित के घर और दुकान को आग के हवाले करने का प्रयास किया। हालांकि, मौके पर मुस्तैद पुलिस बल ने स्थिति को भांपते हुए तुरंत मोर्चा संभाला और हल्का बल प्रयोग कर उग्र भीड़ को वहां से खदेड़ा। हालांकि, देर रात फारेंसिक टीम पर घटनास्थल पहुंची और साक्ष्य जुटाए। इसके साथ ही रातभर घटना स्थल पर पुलिस का पहरा रहा। गलियों से खदेड़े जाने के बाद भी प्रदर्शनकारियों का गुस्सा शांत नहीं हुआ। हिंदू संगठनों की भीड़ इसके बाद लक्खीबाग पुलिस चौकी और फिर शहर कोतवाली जा पहुंची। दोनों ही जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने जोरदार हंगामा और नारेबाजी की।
भीड़ ने बाजार में घूमकर दुकानें बंद करा दीं। देर रात तक पूरे क्षेत्र में भारी तनाव की स्थिति बनी रही। सड़कों पर सिर्फ पुलिस के बूटों की आवाज और सायरन गूंजते रहे, जिसने इस पूरी रात को देहरादून के इतिहास की सबसे अशांत रातों में से एक बना दिया। पीड़िता की मां ने पुलिस को बताया कि वह मूल रूप से बिहार के रहने वाले हैं और दून में मजदूरी करते हैं। यहां आढ़त बाजार क्षेत्र में वह एक मुस्लिम व्यक्ति के घर पर किराये पर रह रहे थे। यहीं मकान मालिक और उसके बेटे व अन्य रिश्तेदार भी आते-जाते रहते हैं। साथ ही घर के सामने ही उनकी दुकान है।
