भाजपा नेता अजेंद्र अजय के बयान से पार्टी के भीतर गदर मचा हुआ है, एक तरफ इसे कार्यकर्ताओं की नाराजगी के रूप में देखा जा रहा है, तो इस सिचुएशन पर कांग्रेस ने भी एंट्री करते हुए इसे नाराजगी की शुरुवात बताया है, खास बात ये है कि बीजेपी अध्यक्ष महेंद्र भट्ट की हिदायद भी इन हालातों को सुधारने में सफल नहीं दिख रही है, ऐसे में पार्टी किसी बड़े कदम को उठाने के भी मूड में दिख रही है। उत्तराखंड की सियासत में इन दिनों भाजपा के भीतर की खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आती दिखाई दे रही है, बदरी-केदार मंदिर समिति के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा नेता अजेंद्र अजय के एक बयान ने न केवल पार्टी के अंदर हलचल मचा दी है, बल्कि विपक्ष को भी भाजपा पर हमला करने का मौका दे दिया है, स्थिति ऐसी बन गई है कि पार्टी नेतृत्व को भी सामने आकर नेताओं को सार्वजनिक बयानबाजी से बचने की हिदायत देनी पड़ी है।
दरअसल उत्तराखंड में भाजपा की राजनीतिक स्थिति लंबे समय से मजबूत मानी जाती रही है, लगातार चुनावी सफलताओं और संगठनात्मक मजबूती के कारण पार्टी सत्ता और संगठन दोनों स्तरों पर प्रभावशाली स्थिति में है, लेकिन समय-समय पर पार्टी के भीतर से उठने वाली नाराजगी की आवाजें नेतृत्व के लिए चुनौती बनती रही हैं, इसी कड़ी में अब अजेंद्र अजय का बयान चर्चा का विषय बन गया है, जो सबसे बड़ा विद्रोह माना जा रहा है। मामला तब शुरू हुआ जब अजेंद्र अजय ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी नाराजगी जाहिर की, उन्होंने सीधे तौर पर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस तरह से व्यवस्थाएं चल रही हैं, उससे वे आहत हैं, उन्होंने यह भी कहा कि यदि हालात ऐसे ही रहे, तो वे राजनीति से संन्यास लेने तक पर विचार कर सकते हैं।
खास बात यह रही कि अजेंद्र अजय ने अपनी नाराजगी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान से भी जोड़ा, जिसमें उन्होंने कहा था कि आने वाला दशक उत्तराखंड का दशक होगा, अजेंद्र अजय का कहना था कि यदि सच में राज्य के लिए यह दशक महत्वपूर्ण बनने वाला है, तो राज्य में व्यवस्थाओं और कामकाज में भी उसी स्तर की गंभीरता दिखाई देनी चाहिए। अजेंद्र अजय का यह बयान सामने आते ही भाजपा के भीतर असहज स्थिति बन गई, क्योंकि मामला केवल सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे प्रधानमंत्री के बयान से जोड़कर देखा जाने लगा, ऐसे में पार्टी के लिए इसे हल्के में लेना संभव नहीं था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने तुरंत हस्तक्षेप किया, उन्होंने अजेंद्र अजय से बातचीत कर स्थिति को संभालने की कोशिश की और पार्टी नेताओं को सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया पर संयम बरतने की नसीहत दी, महेंद्र भट्ट ने स्पष्ट तौर पर कहा कि पार्टी के भीतर किसी भी तरह की असहमति या नाराजगी को सार्वजनिक करने के बजाय संगठन के मंचों पर उठाया जाना चाहिए। भाजपा के भीतर चल रही इस हलचल के बीच विपक्षी दल कांग्रेस भी सक्रिय हो गया है, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इस पूरे घटनाक्रम को भाजपा के भीतर बढ़ती नाराजगी का संकेत बताया है, उन्होंने कहा कि अजेंद्र अजय ने जो कहा है, वह केवल उनकी व्यक्तिगत राय नहीं है, बल्कि भाजपा के कई कार्यकर्ताओं की भावना को दर्शाता है।
