Per capita income में राष्ट्रीय दर से आगे निकला उत्तराखंड, बेरोजगारी दर में भी आई कमी

उत्तराखंड की GSDP के 1.3 गुना बढ़ने की ईटीवी भारत की खबर पर आज सरकार ने भी आंकड़े पेश कर मुहर लगाई, सरकार में सचिव नियोजन आर मीनाक्षी सुंदरम ने मीडिया से बात करते हुए आंकड़े पेश किये और राज्य के आर्थिकी आकार में बढ़ोतरी की जानकारी दी।

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खास बात यह है कि राज्य में आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने के कारण इसका सीधा असर प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय और रोजगार पर भी हुआ है, इसके अलावा ऊर्जा सचिव होने के नाते आर मीनाक्षी सुंदरम ने एनर्जी सेक्टर में किए गए बड़े बदलावों की भी जानकारी दी।

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वहीं, प्रदेश में महिलाओं का रोजगार के क्षेत्र में प्रतिनिधित्व बढ़ा है, इसके पीछे की वजह सरकार की कुछ ऐसी पॉलिसीज में संशोधन और नई योजनाओं को शुरू करना है, जिसके कारण महिलाएं रोजगार से जुड़ी है।

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महिलाओं को नाइट शिफ्ट की मिली अनुमति: सचिव नियोजन के अनुसार शॉप एंड एस्टेब्लिशमेंट एक्ट और फैक्ट्री एक्ट नियम में संशोधन किए गए, जिसके कारण महिलाओं को नाइट शिफ्ट के लिए भी अनुमति दी गई, इतना ही नहीं लखपति दीदी कार्यक्रम और होमस्टे की योजना ने भी महिलाओं की रोजगार में हिस्सेदारी को बढ़ाया है।

साल 2022-23 में महिलाओं की प्रतिभागिता 26 प्रतिशत थी, जोकि 2023-24 में बढ़कर 32.4% हो गई है. उत्तराखंड में आर्थिक गतिविधियों के बढ़ने के साथ ही यहां के GSDP में भी बढ़ोतरी हुई है, उत्तराखंड की GSDP जो 20 महीने पहले 274000 करोड़ थी, वह अब बढ़कर 346000 करोड़ हो गई है. इसमें सबसे बड़ा योगदान पर्यटन क्षेत्र का है।

इसके अलावा मैन्युफैक्चरिंग, एनर्जी और सर्विस सेक्टर में भी राज्य की आर्थिकी को बल दिया है, पर्यटन सेक्टर की जीएसडीपी में 37% की भागीदारी थी, जो अब बढ़कर 43.7 प्रतिशत हो गई है, उत्तराखंड की आर्थिकी में हो रहे सुधार के बीच यहां के रोजगार में भी बेहतरी आ रही है, आंकड़े तो कुछ यही बयां कर रहे हैं।

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