सरकारी सिस्टम का कारनामा देखिए, जो किताब एनसीईआरटी दिल्ली 65 रुपये में उपलब्ध करा रहा है, वही किताबें उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा विभाग 100 से लेकर 118 रुपये में बाजार में बेच रहा है। बाजार में उपलब्ध उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा से प्रकाशित कुछ किताबों में केवल कवर ही बदला गया, पूरा कंटेंट एनसीईआरटी का उठाया है, लेकिन कीमतें 35 से 53 रुपये बढ़ा दी हैं। अभिभावक सवाल उठा रहे हैं कि जब बाजार में एनसीईआरटी की किताबें उपलब्ध हैं तो किसके फायदे के लिए राज्य सरकार ने महंगी किताबें छपवा दीं। आरोप तो यह भी लग रहा है कि स्कूलों को एनसीईआरटी के बजाय उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा की किताबें खरीदने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। ऐसे में कमीशन के कटघरे में सरकारी सिस्टम खड़ा नजर आ रहा है।
Uk360 न्यूज ने बाजार में किताबों के दाम, पेज संख्या और चैप्टर को लेकर पड़ताल की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। समान कंटेंट के बावजूद किताबों की कीमतों में भारी अंतर था। कक्षा एक की अंग्रेजी की किताब ‘मृदंग’ (एनसीईआरटी) की कीमत जहां 65 रुपये है, वहीं उत्तराखंड की इसी 119 पेज वाली किताब की कीमत 100 रुपये है। कक्षा छह की विज्ञान की उत्तराखंड सरकार से प्रकाशित किताब 118 रुपये की है। उत्तराखंड शिक्षा विभाग द्वारा एनसीईआरटी के विकल्प के रूप में प्रकाशित किताबों के दाम 80 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। इस सरकारी मूल्यवृद्धि से अभिभावक भी हैरान हैं।
शिक्षा विभाग के अनुसार, एनसीईआरटी की ओर से पर्याप्त पुस्तकें उपलब्ध कराने में असमर्थता के बाद टेंडर प्रक्रिया के तहत राज्य ने अपनी किताबें छापीं। तर्क है कि कागज की गुणवत्ता, छपाई लागत और रॉयल्टी भुगतान के कारण किताबें एनसीईआरटी की तुलना में महंगी हैं। प्राइवेट स्कूलों की ओर से थोपी जा रही निजी प्रकाशकों की महंगी किताबों के बीच अब सरकारी किताबें भी अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ा रही हैं। एक ही पाठ्यक्रम होने के बावजूद एनसीईआरटी और उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा विभाग की किताबों के दामों में बड़ा अंतर सामने आया है। राज्य की कुछ किताबें एनसीईआरटी की तुलना में करीब 80 फीसदी तक महंगी हैं।
उत्तराखंड के निजी और सरकारी स्कूलों में एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू है। एनसीईआरटी अपनी किताबें खुद प्रकाशित कर बाजार में उपलब्ध कराता है। वहीं, पिछले कुछ वर्षों से उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा विभाग भी एनसीईआरटी के विकल्प के रूप में अपनी किताबें उपलब्ध करा रहा है। हालांकि राज्य सरकार की किताबों में कुछ विषयों में आंशिक बदलाव किए गए हैं, लेकिन ज्यादातर विषयों में एनसीईआरटी का ही पाठ्यक्रम बरकरार रखा गया है। इसके बावजूद दोनों की किताबों के दामों में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। सबसे ज्यादा अंतर गणित की किताबों में है।
