सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भिकियासैंण में प्रसव के बाद नवजात की मौत से आक्रोश। परिजनों ने डॉक्टरों पर लगाया लापरवाही का आरोप, एसडीएम याक्षी अरोड़ा ने संभाला मोर्चा। भिकियासैंण अल्मोड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) भिकियासैंण में रविवार को एक नवजात शिशु की मौत के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए स्थानीय निवासियों और परिजनों ने अस्पताल के मुख्य गेट पर सांकेतिक तालाबंदी कर दी। आक्रोशित लोगों ने अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
मामला बाड़ीकोट (गांधीनगर) निवासी उमा देवी से जुड़ा है। उन्हें रविवार सुबह प्रसव पीड़ा होने पर सीएचसी में भर्ती कराया गया था, जहां सुबह आठ बजे उन्होंने एक पुत्र को जन्म दिया। दोपहर में नवजात की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी, जिसे देखते हुए डॉक्टरों ने उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया। दुर्भाग्यवश, एंबुलेंस से ले जाते समय महज छह किमी दूर नवजात ने दम तोड़ दिया। शिशु की मौत की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण अस्पताल पहुंच गए। उन्होंने डॉक्टरों पर समय से उचित इलाज न देने और अस्पताल में मानकों के अनुसार सुविधाएं न होने का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि अगर अस्पताल में पर्याप्त इंतजाम होते, तो मासूम की जान बच सकती थी। हंगामे की सूचना मिलते ही एसडीएम याक्षी अरोड़ा मौके पर पहुंचीं।
पीड़ित पिता कुबेर सिंह ने एसडीएम को लिखित पत्र सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। एसडीएम के हस्तक्षेप और उचित कार्रवाई के आश्वासन के बाद ही प्रदर्शनकारी शांत हुए। इस दौरान नगर पंचायत अध्यक्ष दीपक बिष्ट सहित कई सभासद और स्थानीय महिलाएं अस्पताल परिसर में मौजूद रहीं। वहीं, सीएचसी की चिकित्सक डॉ0 शिबांगी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि प्रसव के दौरान ही शिशु द्वारा गर्भ के अंदर मल-मूत्र करने के लक्षण मिले थे। इसके बावजूद सुरक्षित प्रसव कराया गया, लेकिन स्थिति गंभीर होने पर उसे तत्काल हायर सेंटर रेफर किया गया था। प्रशासन अब इस मामले की विस्तृत जांच की तैयारी कर रहा है।
