रुद्रप्रयाग में नगरासू गुरुद्वारा प्रकरण को लेकर उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) और उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा ने सरकार एवं प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। दोनों संगठनों ने बुधवार को नगरासू में आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि चार दिनों तक चले घटनाक्रम ने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया पर उत्तराखंड और पहाड़ी समाज के खिलाफ की जा रही कथित टिप्पणियों पर भी नाराजगी जताई। स्वाभिमान मोर्चा के नेता त्रिभुवन चौहान ने कहा कि नगरासू का मामला निहंग सिख बनाम उत्तराखंड का नहीं, बल्कि दो पक्षों के बीच हुए विवाद का था, जिसकी निष्पक्ष जांच तत्काल होनी चाहिए थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग सोशल मीडिया के माध्यम से उत्तराखंड के लोगों को लगातार उकसाने और माहौल बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में शांति और सामाजिक सौहार्द बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है तथा किसी भी प्रकार की अराजकता को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उक्रांद के युवा नेता आशीष नेगी ने आरोप लगाया कि जिन लोगों पर मारपीट, तोड़फोड़, पुलिस पर पथराव और हथियार लहराने जैसे आरोप लगे, उनके खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि एक ओर बाहरी राज्यों के जनप्रतिनिधि अपने लोगों के समर्थन में सक्रिय रहे, जबकि स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका अपेक्षित नहीं रही।
आशीष नेगी ने कहा कि कुछ लोग लगातार पहाड़ी समाज को चुनौती देने वाले बयान दे रहे हैं, जिससे स्थानीय लोगों में आक्रोश है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी धर्म या समुदाय से नहीं है, बल्कि कानून व्यवस्था और उत्तराखंड के सम्मान से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक सम्मान से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। दोनों नेताओं ने बताया कि 25 जून को कुछ संगठनों के उत्तराखंड आने की चर्चाओं के बीच वे गुरुवार सुबह नौ बजे रुद्रप्रयाग स्थित गुलाब राय मैदान में शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होंगे। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी का विरोध नहीं, बल्कि उत्तराखंड के स्वाभिमान और सामाजिक एकता का संदेश देना है।
