विचारनीय: गरीब और आम आदमी ईलाज के अभाव में तोड़ रहा दम,जनता की कौन लेगा सुध?-बिट्टू कर्नाटक

अल्मोड़ा में आज प्रैस को जारी एक बयान में पूर्व दर्जा मंत्री बिट्टू कर्नाटक ने कहा कि उत्तराखंड की जनता स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में दम तोड़ रही है। वही दूसरी ओर माननीयों और उनके परिवारजनों का ईलाज विदेश में कराने को माननीय एकजुट होकर विधेयक तक पास कर दे रहे हैं,यह स्पष्ट तौर पर जनता की भावनाओं पर कुठाराघात है। बिट्टू कर्नाटक ने कहा कि आज अल्मोड़ा सहित उत्तराखंड के सरकारी अस्पतालों, मेडिकल कालेजों की यह स्थिति है कि ईलाज के अभाव में गरीब और आम आदमी दम तोड़ रहा है।

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अल्मोड़ा के परिपेक्ष्य में आज सर्वविदित है कि अल्मोड़ा का मेडिकल कालेज मात्र रेफरल सेन्टर बन कर रह गया है। दुर्घटना में घायल व्यक्तियों को सीधा हल्द्वानी रैफर कर दिया जाता है जो उनके लिए जानलेवा साबित होता है।विगत समय में जंगल की आग में झुलसे आधा दर्जन से अधिक लोगों को अल्मोड़ा में कोई ईलाज नहीं मिल पाया और  वे काल का ग्रास बने। उन्होंने कहा कि माननीय आम जनता के लिए मेडिकल कालेज और चिकित्सालयों में स्वास्थ्य सुविधा बढ़ाने के लिए कभी एकजुट नहीं होते हैं ,लेकिन अपने और अपने परिवार के सदस्यों का विदेशों में इलाज करवाने एवं अपने वेतन भत्ते बढ़ाने पर एकजुट होकर अध्यादेश बनाने तक को तत्पर हो जाते हैं।

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बिट्टू कर्नाटक ने कहा कि उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों ने अपनी जान पर खेलकर उत्तराखंड राज्य बनवाया था जो आज माननीयों की भेंट चढ़ गया है। उन्होंने कहा कि प्रसूता महिलाओं के लिए पहाड़ों के चिकित्सालय आज मात्र रेफर सेंटर और जानलेवा बने हुए हैं। कोई भी माननीय उत्तराखंड की आम जनता की सुध नहीं ले रहा है,यह सभी महानुभाव केवल अपने लाभ के लिए विचारमग्न हैं। उन्होंने कहा कि विधानसभा एक ऐसी जगह हैं जहां जनता के चुने हुए प्रतिनिधि जनता के लिए अपने महत्वपूर्ण एवं जन उपयोगी बातें सदन में उठाने एवं राज्य की जनता के लिए लाभदायक अध्यादेश लाते हैं।

लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में विधानसभा में जनता के प्रतिनिधि अपने निजी स्वार्थों को पूरा करने के लिए अध्यादेश ला रहे हैं जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं। बिट्टू कर्नाटक ने कहा कि यह राज्य का दुर्भाग्य है कि यहां के माननीय महानुभाव अपनी जनता के बारे में न सोचकर केवल अपने व अपने परिवार के बारे में सोचते हैं,इस राज्य के आम जनमानस की उनको कोई चिंता नहीं है।

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