अल्मोड़ा में ‘जय गोल्ज्यू’ उत्सव की धूम, जम्मू से राजस्थान तक की लोक कलाओं ने दर्शकों को थिरकने पर किया मजबूर

सांस्कृतिक विरासत की नगरी अल्मोड़ा इन दिनों ‘जय गोल्ज्यू महोत्सव 2025’ के उल्लास में पूरी तरह डूबी हुई है। महोत्सव का 31 अक्टूबर का दिन कला, भक्ति और मनोरंजन का एक शानदार संगम लेकर आया, जहाँ दिन भर भजन प्रतियोगिताओं में आस्था की रसधारा बही, वहीं शाम ढलते ही राष्ट्रीय स्तर के लोक नृत्यों और उत्तराखंड के स्टार गायकों ने ऐसा समां बाँधा कि दर्शक देर रात तक झूमने पर मजबूर हो गए।

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भक्ति और सुरों का संग्राम में दीपालय ने मारी बाजी
दिन के कार्यक्रमों की शुरुआत भजन प्रतियोगिता से हुई, जिसमें भक्ति के रंग में सराबोर कुल 18 टीमों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। हर टीम ने अपनी दमदार प्रस्तुति से पंडाल को भक्तिमय कर दिया। कड़े मुकाबले के बाद, दीपालय की टीम ने अपनी प्रस्तुति के लिए प्रथम स्थान हासिल किया। वहीं, दुर्गा शक्ति (न्यू इंदिरा कॉलोनी) की टीम को द्वितीय स्थान और कला संस्कृति संगम को तृतीय स्थान से संतोष करना पड़ा। प्रतियोगिता ने दिखाया कि अल्मोड़ा में कला और भक्ति का स्तर कितना ऊंचा है।

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महोत्सव का आकर्षण तब चरम पर पहुँचा, जब देश के विभिन्न राज्यों के कलाकारों ने अपनी संस्कृति का प्रदर्शन किया। जहां जम्मू के कलाकारों ने अपनी ऊर्जा और जोश से भरपूर डोगरी लोकनृत्य प्रस्तुत कर सबका ध्यान खींचा। पंजाब की प्रस्तुति में रंग-बिरंगे परिधानों में कलाकारों ने पारंपरिक गिद्दा नृत्य से खुशियों का संचार किया।तो वही राजस्थान के कलाकारों ने अपने रोमांचक और मोहक कालबेलिया लोकनृत्य से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

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फैंसी ड्रेस और लोकगायकों का जादू ,सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच, बच्चों के उत्साह से भरी फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता ने भी खूब तालियाँ बटोरीं। 13 प्रतिभागियों ने अपनी रचनात्मकता दिखाई, जिसमें प्रियंगी चंद्रा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि मिनीषा और प्रगति पंत संयुक्त रूप से द्वितीय स्थान पर रहीं।

आखिर में, मंच पर छा गई स्टार नाइट उत्तराखंड के लोकप्रिय लोकगायक नवीन पाठक जी ने अपने चार्टबस्टर गीत “दगड़ी कमला” से श्रोताओं को नाचने पर मजबूर कर दिया। उनके साथ लोकगायिका दीपिका राज जी ने भी अपने सुरों का जादू बिखेरा और पूरे समां को संगीतमय बना दिया। देर रात तक दर्शक लोक संगीत की धुन पर थिरकते रहे।

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