दुकानें जलती रहीं, उठा धुएं का गुबार, तीन घंटे बाजार में रही दहशत; मची भगदड़…कई लोग गिरकर चोटिल

हल्द्वानी नया बाजार में दुकानों में लगी आग के दौरान घटनास्थल से मात्र 200 मीटर दूर फायर हाइड्रेंट नहीं चला। फायर हाइड्रेंट नहीं चलने से दिवाली में हुई संयुक्त जांच सवालों के घेरे में हैं। लोगों का आरोप है कि फायर हाइड्रेंट चलता तो दुकान मालिकों को 50 लाख से अधिक का नुकसान नहीं उठाना पड़ता।

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बाजार क्षेत्र में फायर हाइड्रेंट हैं। दिवाली के समय स्थानीय प्रशासन, फायर ब्रिगेड और जल संस्थान की टीम ने फायर हाइड्रेंट का संयुक्त निरीक्षण किया था। टीम ने उस समय रिपोर्ट जारी की थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि बाजार क्षेत्र के फायर हाइड्रेंट सही हैं, लेकिन रविवार को जब बाजार क्षेत्र में आग लगी तो फायर हाइड्रेंट काम नहीं आए जबकि घटनास्थल से वह मात्र 200 मीटर दूर था।

लोगों का आरोप है कि फायर टेंडर को पानी भरकर लाने में आधा घंटे का समय लग गया। कहा कि जब फायर टेंडर खाली हुए तो आग और भड़क गई। कहा कि फायर हाइड्रेंट सही होते तो इतना बड़ा नुकसान नहीं होता।

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नया बाजार की दुकानों में रविवार देर शाम धधकी आग से उठती लाल लपटों और धुएं के गुबार से क्षेत्र में तीन घंटे तक दहशत का माहौल रहा। पांच दुकानों में हुए भीषण अग्निकांड पर काबू पाने में दमकल विभाग की छह गाड़ियां हांफ गईं। कपड़े, लेदर बैग, रेगजीन बैग ने आग को और भड़काने का काम किया। आग के कारण पूरी दुकान खंडहर में बदल गई। इधर सूचना के बाद आग देखने वालों की भीड़ लग गई। घटनास्थल पर लोग मोबाइल लेकर फोटो, वीडियो और फेसबुक लाइव करने लगे। भीड़ के कारण फायर टेंडर को मौके पर पहुंचने में मशक्कत करनी पड़ी। तब पुलिस ने डंडे फटकार कर लोगों को भगाया।

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इससे कई बार भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। इस कारण कई लोग गिरकर चोटिल भी हो गए। एक पुलिस अधिकारी ने लोगों की सड़क किनारे खड़ी बाइकों को भी गिरा दिया। वहीं, दुकानों को धू-धू कर जलता देख आग फैलने के डर से पड़ोसी रोने लगे। लोगों ने आननफानन अपने घरों से सामान निकालना शुरू कर दिया। कोई अपना सामान पड़ोसी के वहां शिफ्ट करने लगा तो कोई अपने घर से पानी लाकर दुकानों पर डालने लगा। 

नया बाजार निवासी मेहनाज ने बताया कि उनकी दुकान में यहीं है। पौने सात बजे के आसपास घटना की सूचना पुलिस और अग्निशमन विभाग को दी थी। लेकिन किसी से इसे गंभीरता से नहीं लिया। कुछ युवाओं का कहना था कि अगर समय रहते घटनास्थल पर फायर की टीमें पहुंचती तो इतना नुकसान नहीं होता। कहा कि जो पहला फायर टेंडर आया उसमें पानी कम था। वह प्रेशर से पानी नहीं फेंक पाया। कहा कि समय से वाहन आते तो आग इतना विकराल रूप धारण नहीं करती।

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