अल्मोड़ा के राजमिस्त्री के पोते पवन ने बिना कोचिंग पास की PCS परीक्षा, बने सहायक आयुक्त राज्य कर

सपने जब मेहनत और लगन का साथ पाते हैं तो मंजिल खुद कदम चूमती है। इसका जीवंत उदाहरण बने हैं नैनीताल में होटल कर्मचारी के बेटे पवन कुमार, जिन्होंने उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (पीसीएस) परीक्षा में पहले ही प्रयास में सफलता हासिल कर सहायक आयुक्त राज्य कर पद पर चयन प्राप्त किया है। सामान्य परिवार के पवन ने न केवल कठिन परिस्थितियों को मात दी, बल्कि अपने गांव के पहले अधिकारी बनने का गौरव भी हासिल किया है।

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मूल रूप से अल्मोड़ा जिले के मटकन्या गांव निवासी राजेंद्र प्रसाद वर्षों पहले रोजगार की तलाश में नैनीताल आए थे। होटल में साधारण कर्मचारी के रूप में शुरू हुई उनकी यात्रा मेहनत और ईमानदारी के बल पर प्रबंधक पद तक पहुंची। राजेंद्र के पिता स्व. दुर्गा राम राजमिस्त्री थे। परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य थी, लेकिन राजेंद्र प्रसाद और उनकी पत्नी तारा देवी का सपना बड़ा था, चार संतानों में से कोई एक अधिकारी बने और परिवार का नाम रोशन करे। तीन भाई एक बहन में दूसरे नंबर के पवन बचपन से ही मेधावी रहे। उन्होंने प्राथमिक शिक्षा गांव के सरकारी विद्यालय से प्राप्त की। इसके बाद उच्चतर माध्यमिक विद्यालय अडोली से दसवीं तथा गांव से दूर होने के कारण बुआ के घर रहकर जीआईसी बाराकुना, अल्मोड़ा से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की।

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उच्च शिक्षा के लिए वह पिता के साथ नैनीताल आ गए। स्नातक के बाद उन्होंने इग्नू से स्नातकोत्तर किया। छात्र जीवन में वे डीएसबी परिसर की एनसीसी इकाई में सीनियर अंडर ऑफिसर भी रहे। वर्ष 2024 में उन्होंने यूजीसी-जेआरएफ नेट परीक्षा भी उत्तीर्ण की। वर्तमान में वह एमबीपीजी कॉलेज में डॉ. जया नैथानी के निर्देशन में राजनीति शास्त्र विषय में पीएचडी कर रहे हैं। पवन ने पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखी। सोमवार को जैसे ही उत्तराखंड लोक सेवा आयोग का परिणाम घोषित हुआ और सूची में अपना नाम देखा, पिता और पुत्र की आंखें खुशी से छलक उठीं। वर्षों की मेहनत और संघर्ष आखिरकार रंग ले आया।

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पवन कुमार की सफलता इसलिए भी विशेष है क्योंकि उन्होंने बिना किसी कोचिंग संस्थान की मदद के पहले ही प्रयास में पीसीएस परीक्षा उत्तीर्ण की है। इससे पहले उन्होंने सात बार सर्विस सेलेक्शन बोर्ड की परीक्षाएं दीं, लेकिन सफलता नहीं मिली। लगातार असफलताओं के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और लक्ष्य पर डटे रहे। पवन बताते हैं कि उनकी इंटरनेट मीडिया में केवल उपस्थिति रही, सक्रियता नहीं। रोजाना करीब आठ घंटे नियमित अध्ययन किया। पुस्तकों के साथ-साथ उपन्यास पढ़ना उनका प्रिय शौक है। वह अपनी सफलता का श्रेय स्वर्गीय दादा दुर्गा राम, माता-पिता और गुरुजनों के आशीर्वाद को देते हैं।

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